नई दिल्ली — प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की तीन देशों की महत्वपूर्ण यात्रा पर रवाना हो गए। रवानगी से पहले उन्होंने कहा कि यह दौरा भारत की ‘एक्ट ईस्ट नीति’, ‘महासागर (MAHASAGAR) विजन’ और मुक्त एवं खुले इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को और मजबूत करेगा।
इंडोनेशिया से होगी यात्रा की शुरुआत
प्रधानमंत्री मोदी 6 से 8 जुलाई तक इंडोनेशिया की यात्रा करेंगे, जो राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के निमंत्रण पर हो रही है।
उन्होंने कहा कि 2018 में दोनों देशों के संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिया गया था और यह उसी के बाद उनकी पहली द्विपक्षीय यात्रा है।
पीएम मोदी इंडोनेशिया में भारतीय समुदाय से मुलाकात करेंगे और राष्ट्रपति प्रबोवो के साथ योग्याकार्ता स्थित प्रम्बानन मंदिर परिसर का दौरा करेंगे, जो दोनों देशों के सांस्कृतिक संबंधों का प्रतीक है।
ऑस्ट्रेलिया में रणनीतिक सहयोग पर जोर
इंडोनेशिया के बाद प्रधानमंत्री ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज के निमंत्रण पर मेलबर्न जाएंगे।
इस दौरान दोनों देशों के बीच निम्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा होगी:
- रक्षा और सुरक्षा
- व्यापार और निवेश
- शिक्षा
- लोगों के बीच संपर्क
- उभरती और महत्वपूर्ण तकनीक
- खेल और स्पोर्ट्स साइंस
पीएम मोदी मेलबर्न में भारतीय समुदाय से भी संवाद करेंगे और उन्हें भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों का महत्वपूर्ण स्तंभ बताया।
न्यूजीलैंड के साथ व्यापारिक रिश्तों को मिलेगी गति
तीसरे चरण में प्रधानमंत्री न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के निमंत्रण पर ऑकलैंड जाएंगे।
उन्होंने कहा कि मार्च 2025 में लक्सन की भारत यात्रा के बाद दोनों देशों के रिश्तों में आई मजबूती को यह दौरा और आगे बढ़ाएगा।
दोनों देशों के बीच आर्थिक, व्यापारिक और वाणिज्यिक सहयोग को विस्तार देने पर चर्चा होगी। साथ ही, मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के जरिए व्यापार बढ़ाने की प्रतिबद्धता भी दोहराई जाएगी।
भारतीय समुदाय की अहम भूमिका
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि तीनों देशों में बसे भारतीय समुदाय ने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने में अहम योगदान दिया है। इस यात्रा के दौरान वह प्रवासी भारतीयों से भी संवाद करेंगे।
इंडो-पैसिफिक रणनीति को मिलेगा बल
प्रधानमंत्री ने अपने बयान के अंत में कहा कि यह दौरा भारत की क्षेत्रीय और वैश्विक रणनीति को मजबूती देगा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति, स्थिरता और सहयोग को बढ़ावा देगा।
यह यात्रा कूटनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक दृष्टि से भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।






