—पाठ्यक्रम में शामिल होंगे डॉ. मुखर्जी के विचार और योगदान, 125 फीट ऊंची प्रतिमा भी बनेगी
कोलकाता: पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सोमवार को घोषणा की कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में राज्य सरकार विभिन्न स्मारक और शैक्षिक परियोजनाओं पर 200 करोड़ रुपये खर्च करेगी। उन्होंने कहा कि अगले शैक्षणिक सत्र से स्कूलों और विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में डॉ. मुखर्जी के जीवन, राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान और पश्चिम बंगाल के गठन में उनकी भूमिका को शामिल किया जाएगा।
मित्रा इंस्टीट्यूशन में की घोषणा
मुख्यमंत्री ने यह घोषणा कोलकाता के भवानीपुर स्थित मित्रा इंस्टीट्यूशन में आयोजित समारोह के दौरान की। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने वर्ष 1906 से 1917 तक इसी विद्यालय में शिक्षा प्राप्त की थी और बाद में 1924 से 1938 तक विद्यालय की प्रबंधन समिति के सदस्य भी रहे थे।
नई पीढ़ी को पढ़ाया जाएगा डॉ. मुखर्जी का योगदान
मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं को यह जानना चाहिए कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने देश और विशेष रूप से पश्चिम बंगाल के निर्माण में क्या भूमिका निभाई। उन्होंने बताया कि उनके राष्ट्रवादी विचार, विधानसभा में दिए गए भाषण, स्वतंत्र भारत के प्रथम उद्योग मंत्री के रूप में उनका योगदान तथा कलकत्ता विश्वविद्यालय के कुलपति के रूप में उनके कार्यों को शैक्षणिक पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाएगा।
विद्यालय के संरक्षण और आधुनिकीकरण की भी घोषणा
भवानीपुर के विधायक के रूप में मुख्यमंत्री ने अपनी विधायक क्षेत्र विकास निधि से 25 लाख रुपये विद्यालय भवन के जीर्णोद्धार के लिए देने की घोषणा की। उन्होंने कोलकाता नगर निगम को अगस्त तक विद्यालय के संरक्षण और पुनरुद्धार की विस्तृत योजना तैयार करने के निर्देश दिए, ताकि इसकी ऐतिहासिक पहचान सुरक्षित रखी जा सके।
200 करोड़ की परियोजनाओं में बनेगी 125 फीट ऊंची प्रतिमा
मुख्यमंत्री ने बताया कि सूचना एवं संस्कृति विभाग चालू वित्त वर्ष में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती के अवसर पर लगभग 200 करोड़ रुपये की विभिन्न परियोजनाएं संचालित करेगा। इनमें उनकी 125 फीट ऊंची प्रतिमा का निर्माण और अन्य स्मारक परियोजनाएं शामिल हैं। उन्होंने अधिकारियों से मित्रा इंस्टीट्यूशन के विकास के लिए भी इस राशि का एक हिस्सा उपयोग करने पर विचार करने को कहा।
विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति से जोड़ने की पहल
मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से राष्ट्र को सर्वोपरि रखने का आह्वान करते हुए कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, स्वामी विवेकानंद की तरह भारत माता को सर्वोच्च आदर्श मानते थे। भारतीय संस्कृति के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से उन्होंने विद्यालय के 1,000 विद्यार्थियों को सिस्टर निवेदिता की प्रसिद्ध पुस्तक “The Master As I Saw Him” की निःशुल्क प्रतियां उपलब्ध कराने की भी घोषणा की।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने किया फैसले का स्वागत
इस अवसर पर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने कहा कि पूर्ववर्ती वाम मोर्चा और तृणमूल कांग्रेस सरकारों ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के योगदान को उचित महत्व नहीं दिया। उन्होंने राज्य सरकार के इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि इससे नई पीढ़ी उनके जीवन, शिक्षा, उद्योग और राष्ट्रीय एकता के लिए किए गए कार्यों से बेहतर ढंग से परिचित हो सकेगी।






