ट्रांजिशन या प्लान्ड हैंडओवर? नीतीश का ‘आशीर्वाद’, सम्राट का उदय! माला पहनाकर बिहार को दिया नया ‘चौधरी’!

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नीतीश कुमार ने सम्राट चौधरी को माला पहनाकर दिया बड़ा सियासी संकेत. क्या यही है बिहार का नया नेतृत्व? या नीतीश के उत्‍तराधिकारी? सत्ता के इस ट्रांजिशन के बीच एक ऐसा दृश्य सामने आया, जिसने राजनीतिक गलियारों में बड़ा संदेश दे दिया.

पिछले 29 दिनों से बिहार में मुख्‍यमंत्री को लेकर चर्चा का बाजार गर्म था. अब चर्चा खत्‍म हो चुकी है. यह तय हो गया है कि बिहार के अगले ‘चौधरी’ सम्राट ही होंगे. प्रभात खबर डॉट कॉम ने अपने पाठकों को इस पूरे घटना क्रम की जानकारी 7 अप्रैल को ही दे दी थी. यह बताया था कि अब मुख्‍यमंत्री के चेहरे के रूप में सम्राट के नाम पर कोई कंफ्यूजन नहीं है. यह भी बता दिया था कि खरमास खत्‍म होने के बाद यानी 15 अप्रैल को नए मुख्‍यमंत्री का शपथ ग्रहण होना है. जो तय है. लेकिन अब वहीं से बड़ा सवाल ये उठ रहा है कि क्‍या यह सत्‍ता का ट्रांजिशन, प्लान्ड हैंडओवर…?

अभिभावक की भूमिका में नीतीश

माना जा रहा है कि यह बदलाव नहीं है बल्कि नीतीश कुमार का प्लान्ड हस्‍तांतरण है. तभी तो नीतीश कुमार अपनी समृद्ध‍ि यात्रा के दौरान से अब सम्राट के कंधे पर हाथ रखते नजर आए. राजनीतिक जानकार भी ये मानते हैं कि भले ही इसे नीतीश युग का अंत कहा जा रहा हो, लेकिन यह नीतीश का अंत तो बिल्‍कुल भी नहीं है. मौजूदा तस्‍वीर कुछ और ही कहानी बयां करती है. मुख्यमंत्री नीतीश पूरे दिन सम्राट चौधरी के अभिभावक की भूमिका में नजर आए. बल्कि वो सुबह से सम्राट को अपने साथ लेकर घूमते नजर आए. उन्‍होंने आगे बढ़कर सेंट्रल हॉल के भीतर भी उनका सम्‍मान किया. और सभी सदस्‍यों से भी उनका सम्‍मान करने का आग्रह किया.

नीतीश ने अपने गले की माला पहनाई

सीएम नीतीश इस दौरान पूरी तरह से उत्‍साहित और ऊर्जावान नजर आ रहे थे. सम्राट को मुख्‍यमंत्री बनाने की खुशी उनके चेहरे पर साफ देखी जा सकती थी. सीएम इतने उत्‍सा‍हित थे कि नीतीश कुमार ने अपने गले की माला उतारकर सम्राट के गले में डाल दी.

बेटे की तरह झुके सम्राट

जब सीएम नीतीश ने अपने गले की माला सम्राट के गले में डाली तो सम्राट ने भी सीएम नीतीश के पांव बेटे की तरह झुककर छुए. इतना ही नहीं जब सम्राट ने वो माला उतारनी चाही, तब भी नीतीश कुमार ने वो माला उतारने से रोक दिया. इसे महत्‍वपूर्ण माना जा रहा है. उनके इस एक्‍शन को देखकर ये बिल्‍कुल भी नहीं कहा जा सकता कि सीएम नीतीश कहीं से कमजोर हैं.

माला उतारने से क्‍यों रोका!

दरअसल, हिंदू संस्‍कृति में माला, विजय का प्रतीक होता है. विजय यानी जीत, सीएम नीतीश ने अपने गले की माला सम्राट के गले में डाली. जिसे बड़े संकेत के रूप में देखा जा रहा है. माना जा रहा है यह एक संदेश है. जो सीएम नीतीश पूरे बिहार को दे रहे हैं. जिस तरह से सीएम नीतीश आज नजर आए वो ये बताने के लिए काफी है कि यह सत्‍ता का ट्रांजिशन (बदलाव) नहीं, हैंडओवर (हस्‍तांतरण) है. यहां (बिहार की राजनीति में) जो होगा वो नीतीश कुमार की मर्जी के अनुसार ही होगा. नीतीश कुमार ने सम्राट को अपने गले की माला पहनाकर उन्‍हें बिहार का सम्राट बनाया है.

अरे पहिने रहो ना!

यहां गौर करने वाली बात यह भी रही कि जब सम्राट चौधरी ने नीतीश कुमार के गले वाली पहनाई गई माला उतारने की कोशिश की तो सीएम नीतीश ने उन्‍हें रोक दिया. उन्‍होंने कहा, अरे पहिने रहो ना! इसके बाद उन्‍होंने सदन के भीतर बैठे सभी सदस्‍यों की ओर इशारा कर ताली बजाने और आशीर्वाद देने को भ्‍ीा कहा. इसके बाद सीएम नीतीश ने सम्राट चौधरी के कंधे पर हाथ रखा और काफी देर तक थपथपाते रहे, जैसे कह रहे हों ‘यही मेरा उत्‍तराधिकारी है ।

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