कांग्रेस का हमला— अमेरिका संग डील से किसानों पर पड़ेगा बुरा असर

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नई दिल्ली। कांग्रेस ने भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौते से देश के किसानों और जैविक विविधता पर सीधा खतरा बताया। पार्टी ने कहा कि खेती, ऊर्जा सुरक्षा और व्यापार की शर्तें, ये तीन सबसे अहम मुद्दे हैं, जिन पर सरकार ने देशहित को दांव पर लगा दिया है।

कांग्रेस महासचिव एवं सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने सोमवार को यहां पार्टी मुख्यालय में पत्रकार वार्ता में कहा कि छह फरवरी को जारी हुई रूपरेखा अंतरिम समझौते के पहले ही बिंदु में यह तय किया गया है कि भारत अमेरिका से खाद्य और कृषि उत्पादों का आयात बिना किसी शुल्क के करेगा। यह भारतीय किसानों की आजीविका पर सीधा हमला है। अमेरिका से बिना आयात कर के मक्का, ज्वार और सोयाबीन ऑयल आयात होने पर भारत के किसानों को भारी नुकसान होगा। भारत में मक्का, ज्वार और सोयाबीन का बड़ा उत्पादन होता है, लेकिन अमेरिका इन फसलों का कहीं अधिक उत्पादन करता है और भारत जैसे बड़े बाजार की तलाश में है। अगर अमेरिकी उत्पाद बिना शुल्क भारत में बिकेंगे तो भारतीय किसानों का क्या होगा?

उन्होंने कहा कि अमेरिका ने बांग्लादेश के साथ कपास को लेकर समझौता किया है, जिसके तहत अमेरिकी कपास और धागे से बने कपड़े पर अमेरिका में शून्य शुल्क लगेगा, जबकि भारत से निर्यात पर 18 प्रतिशत शुल्क लगेगा। सरकार ने भी अमेरिका से कपास आयात का दरवाजा खोल दिया है। भारत ने 2024-25 में ही अमेरिका से 3,428 करोड़ रुपये का कपास आयात कर लिया, जबकि भारत खुद कपास उत्पादन में सक्षम है। अगर यह आंकड़ा बढ़कर 20 हजार करोड़ रुपये हो गया तो भारतीय कपास किसानों का क्या होगा। इस समझौते से तिरुपुर, सूरत, पानीपत और लुधियाना जैसे वस्त्र उद्योग केंद्रों पर सीधा असर पड़ेगा। भारत से बांग्लादेश को सालाना 24,550 करोड़ रुपये का कपास और धागा निर्यात होता है, लेकिन अब बांग्लादेश अमेरिका से आयात करेगा, जिससे भारतीय किसानों और उद्योगों पर दोहरी मार पड़ेगी।

उन्होंने कहा कि समझौते में अतिरिक्त समानों का उल्लेख है, जिसका मतलब है कि खाद्य और कृषि उत्पादों के अलावा भी अमेरिका से अन्य सामान आयात होंगे। इसमें सेब, संतरा, चेरी, नाशपाती और स्ट्रॉबेरी जैसे फल हैं, जिससे भारतीय फल उत्पादक किसानों को नुकसान होगा।

सुरजेवाला ने कहा कि भारत अब तक जीएम फसलों के आयात की अनुमति नहीं देता था क्योंकि इससे बीज शुद्धता और जैविक विविधता पर असर पड़ता है, लेकिन इस समझौते के बाद प्रसंस्कृत मक्का, ज्वार, सोयाबीन और अन्य उत्पादों के आयात से भारत की जैविक विविधता पर गंभीर खतरा होगा।

उन्होंने कहा कि व्यापार समझौते में गैर-व्यापार अवरोध हटाने का मतलब किसानों की सब्सिडी कम करना और जीएम फसलों को मंजूरी देना है। अमेरिका अपने किसानों को सालाना 1.45 लाख करोड़ रुपये की सब्सिडी देता है, जबकि भारत में प्रति किसान परिवार को केवल 6 हजार रुपये मिलते हैं। इसके बावजूद मोदी सरकार ने अमेरिका की शर्तें मान लीं।

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