कलकत्ता हाई कोर्ट का आदेश: अभिषेक बनर्जी के आवास पर पुलिस कार्रवाई से जुड़े सभी वीडियो रिकॉर्ड सुरक्षित रखें

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कोलकाता। कलकत्ता हाई कोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी के कालीघाट स्थित आवास पर 13 जून को हुई पुलिस कार्रवाई से जुड़े सभी सीसीटीवी फुटेज, ऑडियो और वीडियो रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है। अदालत ने यह आदेश पुलिस कार्रवाई की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई के दौरान दिया।

फिलहाल अंतरिम राहत देने से किया इनकार

मामले की सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने कहा कि अदालत इस समय केवल प्रारंभिक स्तर पर मामले की सुनवाई कर रही है। इसलिए फिलहाल किसी प्रकार की अंतरिम राहत देना उचित नहीं होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्य विवाद पुलिस कार्रवाई की वैधता का है, जिस पर विस्तृत सुनवाई बाद में होगी।

सभी सीसीटीवी, ऑडियो और वीडियो रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का निर्देश

अदालत ने आदेश दिया कि 13 जून को हुई तलाशी और जब्ती अभियान से जुड़े सभी सीसीटीवी फुटेज, पुलिस के पास उपलब्ध ऑडियो रिकॉर्डिंग और वीडियो रिकॉर्डिंग को सुरक्षित रखा जाए। अदालत ने कहा कि अंतिम सुनवाई तक किसी भी प्रकार के साक्ष्य से छेड़छाड़ या उनके नष्ट होने की आशंका नहीं होनी चाहिए।

क्या है पूरा मामला?

13 जून की तड़के पुलिस ने अभिषेक बनर्जी के कालीघाट स्थित आवास पर तलाशी अभियान चलाया था। राज्य सरकार के अनुसार यह कार्रवाई जमीन धोखाधड़ी के एक मामले में आरोपी अभिषेक के सहयोगी सुमित रॉय की तलाश में की गई थी।

पुलिस का दावा है कि मोबाइल टावर लोकेशन से संकेत मिले थे कि सुमित रॉय उस समय अभिषेक बनर्जी के आवास पर मौजूद हो सकते हैं।

याचिकाकर्ता ने पुलिस पर शक्ति के दुरुपयोग का लगाया आरोप

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता किशोर दत्ता ने अदालत में कहा कि उन्हें जांच से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन पुलिस द्वारा शक्ति के कथित दुरुपयोग पर गंभीर सवाल हैं।

उन्होंने तर्क दिया कि किसी पुराने मामले की जांच के नाम पर देर रात या तड़के किसी के घर में प्रवेश कर तलाशी लेना कानून की भावना के अनुरूप नहीं माना जा सकता।

राज्य सरकार ने कार्रवाई को बताया कानूनी

सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार से पूछा कि तलाशी की कार्रवाई देर रात क्यों की गई। इस पर अतिरिक्त महाधिवक्ता राजदीप मजूमदार ने कहा कि यह पूरी तरह रात की कार्रवाई नहीं थी और पुलिस लगातार दरवाजा खटखटाती रही थी।

राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि आरोपी के फरार होने की आशंका के चलते कार्रवाई की गई और यह पूरी प्रक्रिया भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 44 के तहत कानून के अनुरूप की गई।

तीन सप्ताह बाद होगी अगली सुनवाई

अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि अगली सुनवाई से पहले हलफनामा दाखिल किया जाए। इसके बाद याचिकाकर्ता को दो सप्ताह के भीतर अपना प्रत्युत्तर दाखिल करने का अवसर मिलेगा।

मामले की अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद होगी। तब तक अदालत के आदेश के अनुसार पुलिस कार्रवाई से जुड़े सभी सीसीटीवी, ऑडियो और वीडियो रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जाएंगे।

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