कराची के शॉपिंग मॉल में भीषण आग, बुझ गए 26 घरों के चिराग, 18 की पहचान, 76 लोग लापता

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इस्लामाबाद। पाकिस्तान के सिंध प्रांत की राजधानी कराची के गुल शॉपिंग प्लाजा में लगी आग पर 36 घंटे बाद काबू पा लिया गया। आग की लपटों में बुरी तरह झुलसे 26 लोगों की मौत हो गई। इनमें से सिर्फ 18 लोगों की पहचान हो पाई है। इनमें दमकल कर्मचारी फुरकान भी शामिल है। 76 से अधिक लोग लापता हैं। एमए जिन्ना रोड स्थित इस शॉपिंग प्लाजा को सिंध सरकार ने गिराने का फैसला किया है।

दुनिया न्यूज की रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई। इस भयानक आग में बहुमंजिला प्लाजा का अधिकांश हिस्सा ढह गया है। चिंता जताई गई कि बची हुई इमारत कभी भी गिर सकती है। मलबा हटाया जा रहा है। कराची कमिश्नर की अध्यक्षता में एक जांच समिति बनाई गई है। शवों की पहचान के लिए डीएनए सैंपल कराची यूनिवर्सिटी की लैब में भेजे गए हैं। पुलिस सर्जन डॉ. समिया ने बताया कि शवों की पहचान डीएनए क्रॉस-मैचिंग के जरिए की जाएगी।

दमकल विभाग के प्रभारी हुमायूं अहमद ने बताया कि प्लाजा में लगी आग को पूरी तरह बुझा दिया गया है और अभी कूलिंग ऑपरेशन चल रहा है। शनिवार रात को लगी आग 33 घंटे तक जलती रही। गुल प्लाजा में आग बुझाने और बचाव अभियान में पाकिस्तान नेवी, सिंध रेंजर्स, केएमसी, रेस्क्यू सिंध के अधिकारी और वॉलंटियर्स ने हिस्सा लिया

सिंध के मुख्यमंत्री मुराद अली शाह ने कहा कि अब तक घटनास्थल से कुल 26 शव बरामद किए गए हैं, जबकि 22 लोग मामूली रूप से झुलसे हुए थे और अब घर लौट आए हैं। उन्होंने कहा कि 65 लोग अभी भी लापता हैं। मुराद अली शाह ने कहा कि आग बुझाने में लगभग 200 अग्निशमन कर्मियों ने हिस्सा लिया। इस दौरान प्रांतीय मंत्री सईद गनी, कराची के मेयर मुर्तजा वहाब, डिप्टी मेयर सलमान मुराद और वरिष्ठ अधिकारी बचाव अभियान के दौरान घटनास्थल पर मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी कि सुरक्षा कारणों से पूरी इमारत को गिराना पड़ सकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मरने वालों की संख्या 50 से 60 के बीच हो सकती है, क्योंकि कई लापता लोगों के मलबे के नीचे फंसे होने की आशंका है। कई बरामद शवों की पहचान अभी बाकी है। प्लाजा में 1,200 से ज्यादा दुकानें थीं। बड़ी संख्या में व्यापारी अचानक बेरोजगार हो गए हैं। मुराद अली शाह ने कहा कि पुनर्वास के के लिए एक कमेटी बनाई गई है। उन्होंने पुष्टि की कि आग लगने के कारणों का पता लगाने के लिए फॉरेंसिक जांच कराई जाएगी। मुख्य सचिव को औपचारिक रूप से फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी बनाने का निर्देश दिया गया है। जरूरत पड़ने पर न्यायिक जांच का विकल्प भी खुला रखा गया है।

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