एनीमिया से बचाव के लिए अपनाएं आयरन युक्त डाइट, जानें जरूरी उपाय

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नई दिल्ली। शरीर में हीमोग्लोबिन या रेड ब्लड सेल्स (RBC) की कमी को चिकित्सा विज्ञान की भाषा में एनीमिया कहा जाता है। यह स्थिति तब उत्पन्न होती है जब शरीर पर्याप्त मात्रा में लाल रक्त कोशिकाएं नहीं बना पाता या अत्यधिक रक्तस्राव के कारण इनकी कमी हो जाती है। एनीमिया को गंभीर स्वास्थ्य समस्या माना जाता है, जो विशेष रूप से महिलाओं में अधिक देखने को मिलती है।

क्या है एनीमिया की पहचान?

चिकित्सकीय मानकों के अनुसार यदि पुरुषों में प्रति 100 मिलीग्राम खून में हीमोग्लोबिन 13.5 ग्राम से कम और महिलाओं में 12 ग्राम से कम हो, तो इसे एनीमिया माना जाता है।

विशेषज्ञों के मुताबिक इसके शुरुआती लक्षण अक्सर सामान्य थकान जैसे लगते हैं, इसलिए लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं। हालांकि, एक साधारण सीबीसी (CBC) जांच से एनीमिया की सही पहचान की जा सकती है।

खून की कमी क्यों होती है?

एनीमिया का सबसे बड़ा कारण शरीर में आयरन की कमी माना जाता है। एक स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में औसतन 3 से 5 ग्राम आयरन होना चाहिए।

इसके अलावा शरीर में कैल्शियम की अत्यधिक मात्रा भी एनीमिया का कारण बन सकती है, क्योंकि ज्यादा कैल्शियम आयरन के अवशोषण में बाधा डालता है।

एनीमिया के प्रमुख लक्षण

  • काम करते समय जल्दी थकान महसूस होना
  • दिनभर कमजोरी और आलस रहना
  • त्वचा का रंग पीला पड़ना
  • सीढ़ियां चढ़ते समय चक्कर आना या सांस फूलना
  • सीने और सिर में दर्द की शिकायत
  • हाथों की हथेलियों और पैरों के तलवों का ठंडा पड़ जाना

बचाव के लिए अपनाएं सही खानपान

आयरन युक्त आहार लें

एनीमिया से बचने के लिए भोजन में चुकंदर, गाजर, पालक, टमाटर और बथुआ जैसी हरी सब्जियों को शामिल करना फायदेमंद माना जाता है।

गुड़ और चना फायदेमंद

रोजाना सुबह भीगे हुए काले चने के साथ गुड़ का सेवन शरीर में आयरन की मात्रा बढ़ाने में मदद कर सकता है।

लोहे की कड़ाही का करें इस्तेमाल

विशेषज्ञों के अनुसार लोहे की कड़ाही में भोजन पकाने से शरीर को प्राकृतिक रूप से आयरन मिलता है।

जरूरत पड़ने पर लें चिकित्सीय सलाह

यदि शरीर में आयरन का स्तर बहुत कम हो, तो डॉक्टर की सलाह पर आयरन सप्लीमेंट या दवाइयों का सेवन किया जा सकता है।

महिलाओं और बच्चों को विशेष सावधानी जरूरी

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार महिलाओं, गर्भवती महिलाओं और बच्चों में एनीमिया का खतरा अधिक रहता है। ऐसे में संतुलित आहार, नियमित जांच और सही जीवनशैली अपनाकर इस समस्या से बचाव किया जा सकता है।

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