आज का दौर आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस यानी AI का है। ऑफिस की ईमेल लिखनी हो, बच्चों का होमवर्क करना हो या किसी जटिल विषय को समझना हो—चैटजीपीटी, ग्रोक और जेमिनी जैसे AI चैटबॉट्स हमारे ‘डिजिटल साथी’ बन गए हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिस स्क्रीन पर आप अपनी समस्याएं लिख रहे हैं, वह आपके लिए मुसीबत का दरवाजा भी खोल सकती है? विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि AI का अंधाधुंध इस्तेमाल आपकी निजता (Privacy) और सुरक्षा में सेंध लगा सकता है।
अपनी पर्सनल चाबी AI के हाथ में न दें!
सबसे बड़ी भूल जो लोग कर रहे हैं, वह है अपनी निजी जानकारी AI को देना। आपको समझना होगा कि ये टूल्स आपके टेक्स्ट को प्रोसेस करने के लिए बने हैं, उसे तिजोरी में रखने के लिए नहीं। कभी भी चैटबॉट्स के साथ अपना आधार नंबर, बैंक डिटेल, पासवर्ड या ऑफिस की कॉन्फिडेंशियल फाइलें शेयर न करें। भले ही कंपनियां डेटा सुरक्षित होने का दावा करें, लेकिन आपके द्वारा फीड किया गया डेटा भविष्य में ट्रेनिंग या रिव्यू के लिए इस्तेमाल हो सकता है। आपकी एक लापरवाही डेटा लीक का बड़ा कारण बन सकती है।
AI डॉक्टर नहीं है, जान जोखिम में न डालें
आजकल लोग छोटी-मोटी बीमारी के लक्षण भी AI से पूछने लगे हैं। याद रखिए, AI केवल पैटर्न के आधार पर जानकारी देता है, वह कोई मेडिकल एक्सपर्ट नहीं है। दवाओं की डोज या बीमारी के इलाज के लिए AI पर निर्भर रहना आपकी जान जोखिम में डाल सकता है। मेडिकल हिस्ट्री और फिजिकल चेकअप का विकल्प कोई भी चैटबॉट नहीं हो सकता। डॉक्टर की सलाह के बिना ली गई दवाएं गंभीर नुकसान पहुंचा सकती हैं।
कानूनी पचड़ों और गलत जानकारी से बचें
AI के साथ अवैध काम जैसे हैकिंग, टैक्स चोरी या किसी सिस्टम में हेरफेर से जुड़ी जानकारी मांगना आपको जेल की हवा भी खिला सकता है। इन प्लेटफॉर्म्स पर कड़ी निगरानी होती है और आपकी गैरकानूनी रिक्वेस्ट्स का रिकॉर्ड रखा जाता है। इसके अलावा, AI की हर बात को ‘पत्थर की लकीर’ न मानें। यह अक्सर पुरानी या गलत जानकारी (Hallucination) भी दे सकता है। निवेश के फैसले या कानूनी मामलों में हमेशा अनुभवी विशेषज्ञों और रियल-टाइम खबरों पर ही भरोसा करें। AI एक अच्छा नौकर तो हो सकता है, लेकिन इसे अपना मालिक न बनने दें।





