ईयू के साथ व्यापार समझौते पर कांग्रेस ने सरकार को घेरा, सीबीएएम टैक्स पर जताई चिंता

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नई दिल्ली। कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव (संचार) एवं राज्यसभा सदस्य जयराम रमेश ने भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) में कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मेकेनिज्म (सीबीएएम) से देश के एल्युमीनियम और स्टील निर्माताओं को छूट नहीं दिए जाने पर चिंता जतायी है। उन्होंने कहा कि ईयू को भारत के एल्यूमिनियम और स्टील निर्यात पहले ही 7 अरब डॉलर से घटकर 5 अरब डॉलर रह गए हैं और सीबीएएम के कारण इस वर्ष से इनमें और गिरावट आने की आशंका है।

जयराम ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि समय के साथ सीबीएएम का दायरा भारत के अन्य औद्योगिक निर्यात वर्गों तक भी बढ़ेगा, जिससे एफटीए से भारत को मिलने वाले किसी भी लाभ को प्रभावी रूप से खत्म किया जा सकता है। भारत और ईयू के बीच एफटीए पर बातचीत पहली बार जून 2007 में शुरू हुई थी। 16 दौर की बातचीत के बाद मई 2013 में इसे निलंबित कर दिया गया था। इसके बाद जून 2022 में वार्ता दोबारा शुरू हुई। यह एफटीए अब तक भारत द्वारा किसी भी व्यापारिक साझेदार को दी गई सबसे बड़ी व्यापारिक छूट है, जिसमें ईयू से भारत में आने वाले 96 फीसदी से अधिक निर्यात पर टैरिफ में कटौती की गई है। इससे भारत के आयात दोगुना होने की संभावना है, जिसका असर व्यापार घाटे पर पड़ेगा।

कांग्रेस नेता ने कहा कि सीबीएएम से भारत के औद्योगिक निर्यात पर गंभीर असर होगा और धीरे-धीरे इसका दायरा अन्य क्षेत्रों तक भी बढ़ सकता है। इससे एफटीए से मिलने वाले लाभ लगभग खत्म हो जाएंगे। उन्होंने ईयू के सख्त स्वास्थ्य और उत्पाद सुरक्षा नियमों को भी चिंता का विषय बताया, जो टैरिफ-रहित व्यापार अवरोध का रूप ले सकते हैं।

जयराम ने भारत के सबसे बड़े निर्यात रिफाइंड तेल को लेकर कहा कि इस तेल का बड़ा हिस्सा रूस से आता है और वॉशिंगटन डीसी से पड़ रहे दबाव के बीच इन व्यापारिक मार्गों के भविष्य को लेकर स्पष्टता जरूरी है।

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