इंदौर में दूषित पानी से एक और महिला की मौत, मृतकों की संख्या बढ़कर 24 हुई

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इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी से होने वाली मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। यहां गुरुवार को दूषित पानी से एक और महिला की मौत हो गई। इसके बाद भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी से मरने वालों की संख्यां बढ़कर 24 हो गई है।

जानकारी के अनुसार, भागीरथपुरा में रहने वाली सुभद्राबाई (78) पत्नी बसंतराव पंवार की 26 दिसंबर को दूषित पानी पीने के बाद हालत बिगड़ी थी। उन्हें काफी उल्टी-दस्त हुए थे। गत 28 दिसंबर को उन्हें चरक हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया था। सुभद्राबाई के बेटे मनीष ने बताया कि दूषित पानी से हालत बिगड़ने के बाद मां को अस्पताल में भर्ती किया गया था, जहां से 31 दिसंबर को उन्हें डिस्चार्ज कर एक हफ्ते की मेडिसिन दी गई थी, लेकिन पांचवें दिन उनकी हालत फिर खराब हो गई। उन्हें गत 8 जनवरी को चरक हॉस्पिटल और फिर शैल्बी हॉस्पिटल में ले गए तो से उन्हें दूसरे हॉस्पिटल रेफर करने की सलाह दी। इस पर इसी दिन उन्हें मेट्रो हॉस्पिटल में एडमिट किया गया था, जहां गुरुवार को उनकी मौत हो गई। परिजन का कहना है कि उन्हें ब्लड प्रेशर, डायबिटीज सहित कोई बीमारी नहीं थी।

इंदौर में गुरुवार को हुई मौत के बाद मृतकों का आंकड़ा 24 पहुंच गया है। मृतकों में उर्मिला यादव (60), नंदलाल पाल (75), उमा कोरी (31), मंजूला (74), ताराबाई कोरी (70), गोमती रावत (50), सीमा प्रजापत (50) जीवन लाल बरेडे (80), अव्यान साहू (5 माह), शंकर भाया (70), संतोष बिगोलिया, अरविंद लखर, गीताबाई, अशोक लाल पंवार, ओमप्रकाश शर्मा, हरकुंवर बाई, रामकली, सुमित्रा बाई, श्रवण खुपराव, हीरालाल, सुनीता वर्मा, कमला बाई, भगवानदास और शुभद्राबाई (78) शामिल हैं।

भागीरथपुरा क्षेत्र में आज भी डायरिया के मिले 06 नए मरीज

इधर, इंदौर के भागीरथपुरा जल जनित घटना से प्रभावित क्षेत्र में अब भी डायरिया के नए मरीज सामने आ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा क्षेत्र में चलाए जा रहे स्वास्थ्यवर्धन’ अभियान के दौरान 48 दलों ने 715 घरों का सर्वे कर 2087 नागरिकों की विभिन्न जॉचें की, इसमें रक्तचाप के 133 तथा मधुमेह के 64 मरीजों का चिन्हांकन किया गया। जिन्हें हेल्थकार्ड देकर आगे की जाँच के लिए रेफर किया गया। इसके अलावा डायरिया (उल्टी-दस्त) के छह नए मरीज मिले, जिन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया है।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. माधव प्रसाद हासानी ने बताया कि 30 दिसम्बर 2025 से 15 जनवरी 2026 तक भागीरथपुरा प्रभावित क्षेत्र में स्वास्थ्य शिविर लगाए गए, जिसमें विभिन्न परामर्श, उपचार, औषधि एवं जॉच संबंधित सेवाएं प्रदान की गई। इस दौरान 14 जनवरी 2026 तक 34631 घरों का सर्वे किया गया, जिसमें 162558 स्क्रीनिंग की गई, जबकि आज 15 जनवरी 2026 तक कुल 441 विभिन्न चिकित्सालयों में भर्ती हुए, जिसमें से 424 स्वस्थ होकर घर जा चुके हैं, 11 वार्ड में उपचाररत हैं तथा 06 आईसीयू में भर्ती है।

उन्होंने बताया कि भागीरथपुरा प्रभावित क्षेत्र में स्थिति तेजी से सामान्य होती जा रही है। आज ओपीडी के 116 मरीजों में से मात्र 06 मरीज डायरिया के आए हैं, जिन्हें प्राथमिक उपचार दिया गया, किसी भी मरीज को रेफर नहीं किया गया। सर्वे, शिविर तथा ओपीडी में सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, नर्सिंग ऑफिसर तथा चिकित्सकों द्वारा लगातार परामर्श दिया जा रहा है।

डॉ हासानी ने बताया कि आज ‘अभियान स्वास्थ्यवर्धन’ के अंतर्गत उपचार, परामर्श एवं जाँच की गई, जिसमें लोगों ने अपने आपको काफी सहज एवं सुरिक्षत महसूस किया तथा उन्होंने कहा कि हेल्थ कार्ड के माध्ययम से हमें अपने स्वास्थ्य सूचकांकों की जानकारी भी मिल रही है तथा स्वास्थ्य के स्तर का पता भी चल रहा है। दल द्वारा दिए गए परामर्श से यह भी जानकारी प्राप्त हो रही है, कि हमें किस तरह की जीवन शैली को अपनाना चाहिए, जिससे कि स्वयं, परिवार एवं समुदाय स्वस्थ रह सके। कलेक्टर शिवम वर्मा के निर्देशानुसार क्षेत्र में 02 एम्बुलेंस लगाई गई हैं तथा 24×7 चिकित्सकों की ड्यूटी क्षेत्र में लगाई गई है।

हाईकोर्ट में हुई सुनवाई

इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से मौत मामले में गुरुवार को मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ में दूषित पेयजल से जुड़े मामलों में दायर पांच याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई हुई। जिसमें मुख्य सचिव अनुराग जैन वर्चुअल उपस्थित हुए। उन्होंने अदालत को बताया कि मामले में जिम्मेदारों को निलंबित किया गया है और अस्पताल में भर्ती सभी लोगों का फ्री इलाज किया जा रहा है। जिन लोगों की मौत हुई है, उनमें कई कोमोरबिड (दूसरी बीमारियां) थे। अदालत ने अगली सुनवाई 20 जनवरी को तय की है। जिसमें शासन को पूरी स्थिति स्पष्ट करते हुए विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।

याचिकाकर्ता वरुण गायकवाड़ के एडवोकेट ऋषि आनंद चौकसे ने बताया कि आज हुई सुनवाई में शासन की ओर से एडवोकेट ने बताया कि कुल मौत 23 हुई हैं, जिनमें से 15 की पुष्टि दूषित पानी से हुई है। 8 लोगों की मौतों के दूसरे कारण भी हो सकते हैं। उन्हें दूसरी बीमारियां भी थी। मामले में कोर्ट ने विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट पेश करने को कहा है कि दूषित पाने से कितने लोगों की मौत हुई है। अगली तारीख पर भी मुख्य सचिव को वर्चुअल उपस्थित होने को कहा गया है।

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