शिक्षक से किंगमेकर तक: राज्यसभा चुनाव में JMM का बैद्यनाथ कार्ड

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रांची: झारखंड की राजनीति में राज्यसभा चुनाव को लेकर बड़ा सियासी उलटफेर देखने को मिल रहा है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने सबको चौंकाते हुए लातेहार के पूर्व विधायक और पूर्व मंत्री बैद्यनाथ राम पर दांव खेलने का फैसला किया है। हालांकि आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है, लेकिन पार्टी सूत्रों के मुताबिक जेएमएम नेतृत्व ने अपने सबसे अनुभवी और भरोसेमंद चेहरों में शामिल बैद्यनाथ राम को दिल्ली भेजने की रणनीति बना ली है। इसे केवल एक उम्मीदवार का चयन नहीं, बल्कि विपक्षी राजनीति के समीकरण बदलने वाली सोची-समझी सियासी चाल माना जा रहा है।

ब्लैकबोर्ड से सत्ता के गलियारों तक

1967 में झारखंड के लातेहार जिले के परसही गांव में जन्मे बैद्यनाथ राम की राजनीतिक यात्रा बेहद दिलचस्प रही है। राजनीति में आने से पहले उन्होंने लातेहार के बनवारी साहू कॉलेज से राजनीति शास्त्र में स्नातक की पढ़ाई की और बाद में ‘सरस्वती शिशु विद्या मंदिर’ में शिक्षक के रूप में कार्य किया। करीब तीन वर्षों तक शिक्षा जगत से जुड़े रहने के बाद उन्होंने नवगठित झारखंड राज्य की राजनीति में कदम रखने का निर्णय लिया।

जब BJP ने नकारा, तो JMM ने संवारा

बैद्यनाथ राम उन नेताओं में गिने जाते हैं जिन्होंने अलग-अलग राजनीतिक दलों में रहते हुए अपनी उपयोगिता साबित की। वर्ष 2000 में उन्होंने जेडीयू के टिकट पर पहली बार विधानसभा चुनाव जीता और खेल, मद्य निषेध तथा स्वास्थ्य जैसे विभागों की जिम्मेदारी संभाली। 2005 में वे बीजेपी में शामिल हुए और लातेहार से जीतकर राज्य के शिक्षा मंत्री बने।

हालांकि 2009 में उन्हें हार का सामना करना पड़ा और 2014 में वे चुनावी मैदान से दूर रहे। 2019 में बीजेपी ने उनका टिकट काट दिया, जिसके बाद अंतिम समय में जेएमएम ने उन्हें अपने साथ जोड़ लिया। बैद्यनाथ राम ने न केवल चुनाव जीता, बल्कि लातेहार में जेएमएम की राजनीतिक पकड़ को भी मजबूत किया।

जेएमएम का भरोसेमंद चेहरा

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बैद्यनाथ राम की सबसे बड़ी ताकत उनका संगठनात्मक अनुभव, प्रशासनिक समझ और विभिन्न राजनीतिक दलों के साथ काम करने का लंबा अनुभव है। यही वजह है कि राज्यसभा चुनाव में जेएमएम ने उन्हें एक ऐसे चेहरे के रूप में चुना है जो पार्टी के राजनीतिक और सामाजिक संतुलन को मजबूत कर सकता है।

अब सबकी नजरें जेएमएम की आधिकारिक घोषणा पर टिकी हैं। यदि बैद्यनाथ राम का नाम अंतिम रूप से घोषित होता है, तो यह उनकी राजनीतिक यात्रा का एक और बड़ा पड़ाव होगा—जहां एक शिक्षक से शुरुआत करने वाला नेता राज्यसभा की दहलीज तक पहुंचने जा रहा है।

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