रिम्स विवाद: पूर्व निदेशक के बचाव में उतरे सरयू राय, बोले- झुका नहीं सके तो CID भेज दी

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रांची: झारखंड के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रिम्स के पूर्व निदेशक प्रो. (डॉ.) राजकुमार के इस्तीफे को लेकर सियासत तेज हो गई है। विधायक सरयू राय ने इस पूरे मामले को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

“झुका नहीं सके तो शुरू किया उत्पीड़न”

सरयू राय ने कहा कि एक अनुसूचित वर्ग के योग्य चिकित्सक को जब विभाग झुका नहीं सका, तो उन्हें शासी निकाय की पहली बैठक से ही परेशान किया जाने लगा। उन्होंने आरोप लगाया कि हर बार झारखंड हाईकोर्ट ने सरकार के आदेशों पर रोक लगाई, लेकिन अंत में CID जांच बैठा दी गई।

गोपनीय पत्र में लगाए गंभीर आरोप

सूत्रों के अनुसार, डॉ. राजकुमार ने इस्तीफे से पहले 8 जून को स्वास्थ्य मंत्री और रिम्स शासी परिषद के अध्यक्ष को एक गोपनीय पत्र लिखा था। इस पत्र में उन्होंने विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि पिछले एक वर्ष से उन्हें मानसिक और प्रशासनिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था।

कामकाज के बावजूद बढ़ता दबाव

पत्र में उल्लेख किया गया कि फरवरी 2024 में पदभार संभालने के बाद उन्होंने मरीज सुविधाओं का विस्तार, जर्जर भवनों का जीर्णोद्धार और नए पाठ्यक्रम शुरू कराने जैसे कई कदम उठाए। इसके बावजूद 15 अप्रैल 2025 को शासी परिषद की बैठक के दौरान उन पर दबाव बनाया गया।

हटाने की प्रक्रिया पर उठे सवाल

डॉ. राजकुमार ने यह भी आरोप लगाया कि जिस दिन वे दिल्ली में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के समक्ष उपस्थित थे, उसी दिन उनके खिलाफ आदेश जारी कर पद से हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई।

हाईकोर्ट से मिलती रही राहत

बताया गया कि उन्होंने हर बार हाईकोर्ट का रुख किया और उन्हें राहत भी मिली। 9 मई को जारी 11 आरोपों वाले कारण बताओ नोटिस का जवाब भी उन्होंने दस्तावेजों के साथ दिया था।

बैठकों के एजेंडे पर भी सवाल

सूत्रों के मुताबिक, शासी परिषद की 61वीं से 64वीं बैठक तक लगातार उन्हें हटाने का एजेंडा रखा गया और बाद में बैठकों की कार्यवाही में भी बदलाव किए गए।

सरकार से जवाब की मांग

सरयू राय ने सरकार से इस पूरे मामले पर जवाब मांगा है। उनका कहना है कि यह केवल एक अधिकारी का मामला नहीं, बल्कि रिम्स की साख और राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़ा गंभीर मुद्दा है।

रिम्स विवाद ने प्रशासनिक पारदर्शिता और राजनीतिक हस्तक्षेप को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की नजरें सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया और आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं।

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