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मुजफ्फरपुर में पंचायत का अजीब फरमान, जिंदा युवती का कराया गया दाह संस्कार

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मुजफ्फरपुर। बिहार में मुजफ्फरपुर जिले के मड़वन प्रखंड अंतर्गत जियन खुर्द गांव से मानवता और सामाजिक न्याय को झकझोर देने वाली एक अजीबोगरीब घटना सामने आई है। यहां एक पंचायत के ‘अनोखे’ और कठोर फरमान के बाद एक जीवित युवती का हिंदू रीति-रिवाज के साथ दाह संस्कार कर दिया गया। समाज में फिर से जगह पाने के लिए परिजनों ने अपनी ही बेटी को कागजों और रस्मों में ‘मुर्दा’ घोषित कर उसका पुतला फूंक दिया।

क्या है पूरा मामला

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मिली जानकारी के अनुसार, करीब एक माह पूर्व जियन खुर्द गांव की एक युवती अपने प्रेमी के साथ घर छोड़कर फरार हो गई थी। इस घटना से आक्रोशित परिजनों ने करजा थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए युवती को बरामद कर लिया और उसे कोर्ट में पेश किया। न्यायालय में दिए गए अपने बयान में युवती ने स्पष्ट किया कि वह बालिग है और उसने अपनी मर्जी से युवक के साथ शादी की है। उसने अपने पति के साथ रहने की इच्छा जताई और साथ ही अपने परिजनों पर ससुराल वालों को प्रताड़ित करने का आरोप भी लगाया। कोर्ट के आदेश के बाद पुलिस ने युवती को उसकी इच्छानुसार उसके ससुराल भेज दिया।

पंचायत का तुगलकी फरमान

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युवती के इस फैसले से उसके परिजन और गांव का एक विशेष तबका इस कदर नाराज हुआ कि उन्होंने परिवार का ‘सामाजिक बहिष्कार’ कर दिया। समाज में दोबारा शामिल होने के लिए पंचायत ने एक बेहद अमानवीय शर्त रखी। फरमान सुनाया गया कि यदि परिवार अपनी बेटी को हमेशा के लिए मृत मानकर उसका अंतिम संस्कार कर देता है, तभी उन्हें वापस समाज का हिस्सा माना जाएगा।

स्थानीय मुखिया विकास कुमार सिंह ने सोमवार को इस घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि सामाजिक दबाव और बहिष्कार खत्म करने के लिए परिवार ने यह कदम उठाया है। वहीं, करजा थानाध्यक्ष रामकृष्ण परमहंस ने बताया कि पुलिस ने नियमानुसार युवती का बयान दर्ज कराया था। चूंकि वह बालिग थी, इसलिए उसे उसके ससुराल भेज दिया गया। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या किसी पर दबाव डालकर इस तरह का कृत्य कराया गया है।

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यह घटना आज के समय में प्रेम विवाह और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के खिलाफ सामाजिक रूढ़िवादिता के चरम को दर्शाती है। जहां कानून एक बालिग लड़की को अपनी पसंद से जीने का अधिकार देता है, वहीं समाज का ऐसा रवैया कई सवाल खड़े करता है।

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