मधेपुरा रेल कारखाने का बड़ा रिकॉर्ड, 60 हजार करोड़ का आर्थिक उत्पादन

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बिहार के मधेपुरा स्थित इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव कारखाने ने राज्य के औद्योगिक विकास के साथ देश की अर्थव्यवस्था में भी महत्वपूर्ण योगदान दर्ज कराया है। स्वतंत्र अध्ययन के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2020 से 2026 के बीच मधेपुरा इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव प्राइवेट लिमिटेड (एमईएलपीएल) परियोजना ने देश में करीब 60 हजार करोड़ रुपये का आर्थिक उत्पादन किया।

अध्ययन के मुताबिक इस अवधि में परियोजना ने करीब 23,800 करोड़ रुपये का सकल मूल्य वर्धन किया। मधेपुरा के जिला सकल घरेलू उत्पाद में परियोजना का प्रत्यक्ष जीवीए योगदान 4.6 प्रतिशत रहा। परियोजना के कारण प्रतिवर्ष औसतन करीब 2,300 रोजगार को भी बनाए रखने में मदद मिली है।

रेल कारखाने की गतिविधियों से स्थानीय अर्थव्यवस्था और आपूर्ति श्रृंखला को भी मजबूती मिली है। बताया गया कि मधेपुरा जिले में पंजीकृत फैक्ट्री रोजगार में परियोजना के प्रत्यक्ष कर्मचारियों की हिस्सेदारी करीब 12 प्रतिशत है। वहीं करीब 90 प्रतिशत स्थानीय खरीद के जरिए घरेलू रेल विनिर्माण आपूर्ति श्रृंखला को बढ़ावा मिला है।

अब तक मधेपुरा कारखाने से भारतीय रेलवे को 650 लोकोमोटिव उपलब्ध कराए जा चुके हैं। मार्च 2028 तक 150 और लोकोमोटिव तैयार कर रेलवे को देने का लक्ष्य रखा गया है। यहां 12 हजार हॉर्सपावर क्षमता वाले डब्ल्यूएजी-12बी प्राइमा टी8 इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव का निर्माण किया जा रहा है।

ये इंजन मुख्य रूप से माल ढुलाई के लिए इस्तेमाल होते हैं और डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पर माल परिवहन क्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इनकी अधिकतम गति 120 किलोमीटर प्रति घंटा बताई गई है।

इसके अलावा एमईएलपीएल ने सीएसआर के तहत मधेपुरा में 17 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया है। इससे स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और ग्रामीण आजीविका को भी सहयोग मिला है। परियोजना का विस्तार बिहार के औद्योगिक और रोजगार परिदृश्य के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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