भारत ने पश्चिम एशिया हमलों को बताया वैश्विक खतरा, कहा—पूरी दुनिया के लिए खतरनाक

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नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान और तीनों सेनाओं के प्रमुखों के साथ बैठक करके भारत की रक्षा तैयारियों पर चर्चा की। इस अहम बैठक में हाल की वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा घटनाओं की भी समीक्षा की गई। रक्षा मंत्री ने कहा कि पश्चिम एशिया में हो रहे हमले न सिर्फ भारत के लिए, बल्कि पूरी दुनिया के लिए चिंता की बात है।

बैठक में डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (डीआरडीओ) के चेयरमैन डॉ. समीर कामत, वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह, सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी, नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी और शीर्ष अधिकारियों ने पश्चिम एशिया में बदलते हालात पर चर्चा की। सुरक्षा समीक्षा बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारत की रक्षा तैयारियों का आकलन किया। पश्चिम एशिया में चल रहा संघर्ष अब चौथे हफ्ते में है और होर्मुज जलमार्ग से होने वाला व्यापार ठप है। अमेरिका-इजराइल के संयुक्त हमले में 28 फरवरी को ईरान के 86 साल के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामनेई की मौत के बाद तनाव बढ़ गया है।

जवाबी कार्रवाई में ईरान ने कई खाड़ी देशों में इजराइली और अमेरिकी संपत्तियों को निशाना बनाया, जिससे पानी के रास्ते में और रुकावटें आईं और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार के साथ-साथ वैश्विक आर्थिक स्थिरता पर भी असर पड़ा। इस बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को लोकसभा में सदस्यों को पश्चिम एशिया में हो रहे घटनाक्रम और भारत पर उनके संभावित असर के बारे में जानकारी दी थी। उन्होंने स्थिति को ‘चिंताजनक’ बताया। उन्होंने आज राज्यसभा में भी इस मुद्दे पर बयान दिया।

प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि चल रहे संघर्ष से पहले कभी नहीं हुई चुनौतियां पैदा हुई हैं, जो न केवल आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी हैं, बल्कि मानवीय भी हैं। उन्होंने कहा कि देश की कच्चे तेल और गैस की जरूरत का एक बड़ा हिस्सा युद्ध से प्रभावित क्षेत्र से पूरा होता है। यह लड़ाई तीन हफ्ते से ज्यादा समय से चल रही है। इसका वैश्विक अर्थव्यवस्था और लोगों की जिंदगी पर बहुत बुरा असर पड़ा है और इसीलिए दुनिया सभी पक्षों से इस लड़ाई को जल्द से जल्द सुलझाने की अपील कर रही है। उन्होंने आगे कहा कि यह इलाका बाकी दुनिया के साथ भारत के व्यापार के लिए एक अहम ट्रेड रूट के तौर पर बहुत जरूरी बना हुआ है।

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