भागलपुर, 28 सितंबर। जिले के नारायणपुर प्रखंड अंतर्गत बैकठपुर दुधैला पंचायत के वार्ड नंबर नौ स्थित कसमाबाद गांव में गंगा की उपधारा ने रौद्र रूप धारण कर लिया है। नदी के भीषण कटाव के कारण देखते ही देखते एक दर्जन से अधिक घर गंगा में समा गए। लगातार बढ़ते कटाव से तटीय इलाके में रहने वाले ग्रामीणों के बीच दहशत का माहौल है।
आंखों के सामने उजड़ रहे आशियाने
गंगा की उग्र लहरों को लगातार घरों की ओर बढ़ता देख तटवर्ती क्षेत्र के लोगों की चिंता बढ़ गई है। नदी में घरों के समा जाने की आशंका के बीच कई ग्रामीण अपने हाथों से ही मकान तोड़कर खिड़की, दरवाजे, चौखट, एस्बेस्टस की चादरें और ईंट जैसी उपयोगी सामग्री निकाल रहे हैं, ताकि कम से कम सामान को सुरक्षित बचाया जा सके।
ग्रामीणों का कहना है कि पक्का मकान बनाने में उनकी जीवन भर की कमाई लगी थी। अब उसी घर को अपनी आंखों के सामने मलबे में बदलते देखना उनके लिए बेहद पीड़ादायक है।
कई परिवार हुए बेघर
कटाव की वजह से कई परिवारों के घर नदी में विलीन हो गए हैं और वे बेघर हो गए हैं। प्रभावित परिवार मवेशियों और जरूरी सामान को लेकर गांव के आसपास अस्थायी झोपड़ियां बनाकर रहने को मजबूर हैं।
वहीं, कुछ परिवार सुरक्षित स्थानों की तलाश में पलायन कर रहे हैं। लगातार कटाव के कारण ग्रामीणों को अपने घर और जमीन दोनों के अस्तित्व को लेकर चिंता सता रही है।
ग्रामीणों ने कटावरोधी कार्य नहीं होने पर जताया रोष
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि समय रहते कटावरोधी कार्य कराया जाता तो इस तरह की स्थिति उत्पन्न नहीं होती। उनका कहना है कि लगातार कटाव के बावजूद स्थायी समाधान की दिशा में पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए।
प्रभावित परिवारों ने जिला प्रशासन और राज्य सरकार से तत्काल राहत, उचित मुआवजा और सुरक्षित पुनर्वास की व्यवस्था करने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक कटाव पर प्रभावी नियंत्रण नहीं किया जाता, तब तक तटीय क्षेत्र में रहने वाले परिवारों पर खतरा बना रहेगा।






