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बेलडांगा हिंसा पर कलकत्ता हाईकोर्ट सख्त, कहा-ज़रूरत पड़ने पर केंद्रीय बलों की तैनाती संभव, अब तक 31 अरेस्ट

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कोलकाता। पश्चिम बंगाल में मुर्शिदाबाद जिले के विभिन्न इलाकों में लगातार हो रही अशांति की घटनाओं को लेकर कलकत्ता उच्च न्यायालय ने गंभीर चिंता जताई है। मंगलवार को सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सुजय पाल और न्यायमूर्ति पार्थसारथी सेन की डिवीजन बेंच ने पुलिस अधीक्षक और जिला मजिस्ट्रेट को निर्देश दिया कि किसी भी हालत में नई अशांति न होने दी जाए और इसके लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएं।

बेलडांगा से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने मौखिक रूप से कहा कि आवश्यकता पड़ने पर केंद्रीय सशस्त्र बलों का उचित इस्तेमाल किया जा सकता है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बेलडांगा को दोबारा किसी भी तरह से असुरक्षित स्थिति में नहीं जाने दिया जाएगा और इसी कारण अदालत को हस्तक्षेप करना पड़ रहा है।

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बेलडांगा में केंद्रीय बलों की तैनाती का आदेश हाईकोर्ट ने क्यों दिया?

अदालत ने कहा कि यदि किसी जिले में इस तरह की घटनाएं बार-बार हो रही हैं, तो प्रशासन को पूर्व नियोजन के तहत लोगों की जान-माल और आजीविका की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने होंगे। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि यदि सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) का समुचित उपयोग नहीं किया गया, तो इस संबंध में हलफनामा दाखिल होने के बाद मामले की न्यायिक समीक्षा की जाएगी। हालांकि, अदालत ने फिलहाल वहां के लोगों की सुरक्षा और जीवन-यापन को प्राथमिक चिंता बताया।

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मुर्शिदाबाद के बेलडांगा इलाके में 16 जनवरी को भारी तनाव और हिंसा की स्थिति उत्पन्न हुई थी, जबकि 17 जनवरी को भी अशांति की घटनाएं सामने आईं। इन घटनाओं को लेकर 19 जनवरी को कलकत्ता उच्च न्यायालय में दो जनहित याचिकाएं दायर की गईं। एक याचिका भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ओर से और दूसरी स्थानीय निवासियों द्वारा दाखिल की गई।

याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि इससे पहले मुर्शिदाबाद के ही शमशेरगंज में अशांति के दौरान उच्च न्यायालय ने केंद्रीय बलों की तैनाती का निर्देश दिया था और इसी तरह का कदम इस मामले में भी उठाया जाना चाहिए। अदालत ने मौखिक रूप से सुझाव दिया कि जरूरत पड़ने पर शमशेरगंज में तैनात केंद्रीय बलों का भी उपयोग किया जा सकता है। इस बीच, भाजपा ने मामले की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) जांच की मांग उठाई है। हालांकि, अदालत ने इस मांग पर निर्णय लेने की जिम्मेदारी केंद्र सरकार पर छोड़ी है।

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कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार दोनों को दो सप्ताह के भीतर हलफनामा दाखिल कर अपना पक्ष स्पष्ट करने का निर्देश दिया है। साथ ही कहा गया है कि जहां भी आवश्यकता हो, वहां केंद्रीय बलों की तैनाती के लिए केंद्र सरकार को उचित कदम उठाने होंगे।

बेलडांगा हिंसा मामले में 31 अरेस्ट

बेलडांगा हिंसा में अबतक 31 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस स्टेशन में चार केस दर्ज किए गए हैं। CCTV से 100 से ज्यादा लोगों को चिन्हित किया गया है। छापेमारी करके भी गिरफ़्तारी की जा रही हैं। CAPF कैंप की 5 कंपनियां हैं और राज्य का दावा है कि उनका भी इस्तेमाल किया गया है और सेंट्रल फोर्स के जवान इलाके में पेट्रोलिंग कर रहे हैं।

क्यों भड़की हिंसा?

यह हिंसा मुख्य रूप से दो समुदायों के बीच विवाद के बाद भड़की, जो देखते ही देखते झड़पों और आगजनी में बदल गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, किसी स्थानीय मुद्दे या आपसी कहासुनी से शुरू हुआ विवाद अचानक हिंसक हो गया, जिसमें पथराव, तोड़फोड़ और आग लगाने की घटनाएं सामने आईं। हालात बिगड़ने पर कई दुकानों, वाहनों और घरों को नुकसान पहुंचा, जिससे सामान्य जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ। हिंसा के दौरान कई लोग घायल हुए और उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।

घटना की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने तत्काल पुलिस बल तैनात किया और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त सुरक्षाबलों को बुलाया गया। तनाव को फैलने से रोकने के लिए कुछ समय के लिए इंटरनेट सेवाएं बंद की गईं और इलाके में निषेधाज्ञा जैसे कदम भी उठाए गए। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने शांति बहाल करने के लिए फ्लैग मार्च किया और स्थानीय लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने तथा संयम बरतने की अपील की। प्रशासन का कहना है कि हालात धीरे-धीरे नियंत्रण में लाए गए, लेकिन एहतियात के तौर पर सुरक्षा व्यवस्था सख्त रखी गई।

राजनीतिक दृष्टि से भी बेलडांगा हिंसा को लेकर बयानबाजी देखने को मिली। विभिन्न राजनीतिक दलों ने एक-दूसरे पर हिंसा को लेकर आरोप लगाए और प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाए। कुछ नेताओं ने इसे कानून-व्यवस्था की विफलता बताया, जबकि सरकार की ओर से कहा गया कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, चाहे वे किसी भी समुदाय या राजनीतिक पृष्ठभूमि से हों। पुलिस ने मामले में कई लोगों को हिरासत में लिया और सीसीटीवी फुटेज व अन्य सबूतों के आधार पर जांच शुरू की गई।

बेलडांगा हिंसा ने एक बार फिर सामुदायिक सौहार्द, प्रशासनिक सतर्कता और अफवाहों की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए केवल पुलिस कार्रवाई ही नहीं, बल्कि स्थानीय स्तर पर संवाद, विश्वास निर्माण और सामाजिक जागरूकता भी जरूरी है। फिलहाल, क्षेत्र में शांति बनाए रखने के प्रयास जारी हैं और प्रशासन का दावा है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

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