काठमांडू। नेपाल की राजनीति में ऐतिहासिक बदलाव के बीच बालेन्द्र शाह ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। रामचन्द्र पौडेल ने शीतल निवास में आयोजित भव्य समारोह में उन्हें पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई।
36 वर्षीय शाह का प्रधानमंत्री बनना न केवल पीढ़ीगत बदलाव का संकेत है, बल्कि यह नेपाल की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत भी माना जा रहा है।
संवैधानिक प्रक्रिया से ऐतिहासिक नियुक्ति
राष्ट्रपति पौडेल ने संविधान के अनुच्छेद 76(1) के तहत प्रतिनिधि सभा में बहुमत प्राप्त दल के नेता के रूप में शाह को प्रधानमंत्री नियुक्त किया। 2015 के संविधान लागू होने के बाद इस प्रावधान के तहत पहली बार प्रधानमंत्री की नियुक्ति हुई है।
इतना ही नहीं, मधेशी समुदाय से किसी व्यक्ति का देश के शीर्ष पद पर पहुंचना भी नेपाल के राजनीतिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
मेयर से सीधे प्रधानमंत्री तक का सफर
काठमांडू महानगर के मेयर पद से इस्तीफा देकर राष्ट्रीय राजनीति में उतरे शाह ने पहली ही बार संसद पहुंचते ही प्रधानमंत्री पद हासिल कर लिया। उन्होंने झापा-5 सीट से पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को करीब 50 हजार मतों के बड़े अंतर से हराया।
यह जीत न सिर्फ राजनीतिक रूप से अहम मानी जा रही है, बल्कि इसे जनसमर्थन की स्पष्ट अभिव्यक्ति भी माना जा रहा है।
युवा टीम के साथ नई सरकार
प्रधानमंत्री शाह ने अपने मंत्रिमंडल में युवा और नए चेहरों को प्राथमिकता दी है।
- स्वर्णिम वाग्ले को वित्त मंत्रालय
- सुदन गुरूंग को गृह मंत्रालय
- शिशिर खनाल को विदेश मंत्रालय
इसके अलावा,
- विराजभक्त श्रेष्ठ (ऊर्जा),
- खड्कराज पौडेल (पर्यटन),
- निशा मेहता (स्वास्थ्य),
- विक्रम तिमिल्सिना (संचार) सहित कई नेताओं को अहम जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।
जनता की उम्मीदें और आगे की राह
बालेन्द्र शाह को एक टेक-सेवी, आधुनिक सोच वाले और साफ छवि के नेता के रूप में देखा जाता है। ऐसे में उनसे सुशासन, भ्रष्टाचार पर नियंत्रण और तेज विकास की उम्मीदें बढ़ गई हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर शाह अपनी शहरी प्रशासनिक शैली को राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने में सफल रहते हैं, तो नेपाल की राजनीति में एक बड़ा परिवर्तन देखने को मिल सकता है।





