निर्मल हृदय आश्रम से बच्चे की बिक्री मामले में सिस्टर कांसिलिया और अनिमा इंदवार साक्ष्य और गवाहों के अभाव में बरी

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–अदालत का फैसला, सात वर्ष पुराने बहुचर्चित मामले का महत्वपूर्ण अध्याय हुआ समाप्त

रांची, 19 जून। मिशनरीज ऑफ चैरिटी द्वारा संचालित निर्मल हृदय आश्रम से बच्चे को कथित रूप से बेचने के बहुचर्चित मामले में रांची सिविल कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए दोनों आरोपित महिलाओं को बरी कर दिया है। अदालत ने साक्ष्य और गवाहों के अभाव में सिस्टर कांसिलिया बाखला और अनिमा इंदवार को दोषमुक्त घोषित किया।

अदालत ने सुनाया फैसला

अपर न्यायायुक्त Shailendra Kumar की अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों की स्थिति का विस्तृत परीक्षण किया। न्यायालय ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपों को प्रमाणित करने के लिए पर्याप्त और ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका।

इसी आधार पर अदालत ने दोनों आरोपितों को संदेह का लाभ देते हुए बरी करने का आदेश दिया।

पीड़ित पक्ष की गवाही नहीं हो सकी

सुनवाई के दौरान सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह रहा कि मामले से जुड़े पीड़ित पक्ष का बयान अदालत में दर्ज नहीं हो सका।

न्यायालय की ओर से कई बार नोटिस जारी किए जाने के बावजूद संबंधित पक्ष गवाही देने के लिए अदालत में उपस्थित नहीं हुआ। इसके कारण अभियोजन पक्ष के आरोपों के समर्थन में आवश्यक प्रत्यक्ष साक्ष्य उपलब्ध नहीं हो सके और मामला कमजोर पड़ गया।

वर्ष 2018 में सामने आया था मामला

यह मामला वर्ष 2018 में सामने आया था और उस समय राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया था। मिशनरीज ऑफ चैरिटी द्वारा संचालित निर्मल हृदय आश्रम में बच्चों की कथित खरीद-फरोख्त के आरोपों ने प्रशासनिक और सामाजिक स्तर पर व्यापक हलचल पैदा कर दी थी।

मामले के उजागर होने के बाद जांच एजेंसियों ने कार्रवाई शुरू की थी और आश्रम की गतिविधियों को लेकर कई सवाल उठे थे।

सीडब्ल्यूसी की शिकायत पर दर्ज हुई थी प्राथमिकी

मामले में चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (सीडब्ल्यूसी) की ओर से प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। जांच के दौरान सिस्टर कांसिलिया बाखला और अनिमा इंदवार पर बच्चे की कथित खरीद-फरोख्त में संलिप्त होने का आरोप लगाया गया था।

इसके बाद दोनों महिलाओं को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया था और मामले की विस्तृत जांच शुरू की गई थी।

लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद आया फैसला

करीब सात वर्षों तक चली जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों की स्थिति के आधार पर अपना फैसला सुनाया।

न्यायालय ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में सफल नहीं रहा। इसलिए आपराधिक न्याय प्रणाली के सिद्धांतों के तहत आरोपितों को दोषमुक्त किया जाता है।

बहुचर्चित मामले का एक अध्याय समाप्त

अदालत के इस फैसले के साथ ही वर्ष 2018 में सामने आए इस बहुचर्चित मामले का एक महत्वपूर्ण अध्याय समाप्त हो गया है। हालांकि यह मामला उस समय बाल संरक्षण संस्थाओं की निगरानी और बच्चों के संरक्षण से जुड़े मुद्दों को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का केंद्र बना था।

प्रमुख बिंदु

  • रांची सिविल कोर्ट ने सिस्टर कांसिलिया बाखला और अनिमा इंदवार को बरी किया।
  • साक्ष्य और गवाहों के अभाव में अदालत ने सुनाया फैसला।
  • पीड़ित पक्ष अदालत में गवाही देने उपस्थित नहीं हुआ।
  • मामला वर्ष 2018 में सामने आया था।
  • सीडब्ल्यूसी की शिकायत पर दर्ज हुई थी प्राथमिकी।
  • दोनों आरोपितों को पहले गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया था।
  • करीब सात वर्ष बाद अदालत ने दोनों को दोषमुक्त घोषित किया।

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