त्रिपुष्कर योग में सत्तुआनी आज: मेष संक्रांति पर सत्तू-आम का होगा सेवन, कल मनाया जाएगा जुड़शीतल

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पटना: आज वैशाख कृष्ण द्वादशी के पावन अवसर पर सत्तुआनी का पर्व श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जा रहा है। इस दिन सूर्यदेव के मीन राशि से मेष राशि में प्रवेश करने के कारण मेष संक्रांति भी मनाई जाती है। इस विशेष संयोग में श्रद्धालु सत्तू और आम का सेवन कर दान-पुण्य करेंगे। कल बुधवार, 15 अप्रैल को मिथिला और बिहार के अन्य क्षेत्रों में जुड़शीतल का पर्व मनाया जाएगा।

त्रिपुष्कर योग का शुभ संयोग

ज्योतिषाचार्य स्वामी दिव्यनन्द सरस्वती के अनुसार इस वर्ष सत्तुआनी पर अत्यंत शुभ त्रिपुष्कर योग बन रहा है। सूर्य के अश्विनी नक्षत्र और मेष राशि में प्रवेश के साथ शतभिषा नक्षत्र, शुक्ल योग और सिद्ध योग का भी संयोग रहेगा, जो इसे विशेष फलदायी बनाता है।

पुराणों में मेष संक्रांति का महत्व

धार्मिक ग्रंथों में मेष संक्रांति की महिमा का विस्तृत वर्णन मिलता है। देवी भागवत पुराण में इस दिन सत्तू दान को अत्यंत पुण्यदायी बताया गया है—

“बैशाखे सक्तु दानं च य: करोति द्विजातये।
सक्तुरेणु प्रभाणद्धि मोदते शिव मंदिरे॥”

तिथि तत्व स्मृति में भी इस अवसर पर सत्तू और जल से भरे घट के दान को श्रेष्ठ माना गया है।

सत्तू-आम के सेवन का धार्मिक और स्वास्थ्य महत्व

मेष संक्रांति से ग्रीष्म ऋतु का आरंभ होता है। ऐसे में शरीर को शीतल रखने वाले आहार का सेवन विशेष रूप से लाभकारी माना गया है। सत्तू और कच्चे आम के टिकोले से बनी चटनी न केवल सुपाच्य होती है, बल्कि शरीर को ठंडक भी प्रदान करती है। यही कारण है कि इस दिन जौ और चने के सत्तू का सेवन करने की परंपरा है।

कल मनाया जाएगा जुड़शीतल

मिथिला क्षेत्र में जुड़शीतल का पर्व 15 अप्रैल को श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। इस अवसर पर रात में मिट्टी के घड़े या शंख में जल रखा जाता है और प्रातःकाल बड़े-बुजुर्ग घर के सदस्यों पर जल छिड़ककर आशीर्वाद देते हैं। मान्यता है कि इससे घर में शीतलता, सुख-समृद्धि और आरोग्यता आती है।

संक्रांति पर स्नान और दान का शुभ मुहूर्त

  • सूर्य संक्रांति: दोपहर 11:25 बजे
  • चर व लाभ मुहूर्त: सुबह 08:40 बजे से 11:50 बजे तक
  • अभिजित मुहूर्त: दोपहर 11:25 बजे से 12:15 बजे तक
  • अमृत मुहूर्त: दोपहर 11:50 बजे से 01:25 बजे तक

मेष संक्रांति के इस पावन अवसर पर गंगा स्नान, दान-पुण्य और सूर्य उपासना का विशेष महत्व है। श्रद्धालु पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना कर रहे हैं।

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