अंबिकापुर (छत्तीसगढ़), 31 मार्च । झारखंड की 19 वर्षीय पहलवान पूनम ऑरन ने संघर्ष और जज्बे की मिसाल पेश करते हुए खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 में स्वर्ण पदक जीतकर शानदार वापसी की है।
चोट के बावजूद जीता फाइनल मुकाबला
पूनम ने महिलाओं के 50 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में तेलंगाना की के. गीता को हराया। खास बात यह रही कि वह बाएं कंधे पर पट्टी बांधकर मुकाबले में उतरीं और दर्द के बावजूद अंत तक डटी रहीं।
9 साल का इंतजार खत्म
अपने करियर का पहला स्वर्ण पदक जीतने के बाद पूनम ने कहा कि उन्होंने कभी हार नहीं मानी। उन्होंने बताया कि करीब छह साल पहले कंधे की गंभीर चोट लगी थी, लेकिन लगातार संघर्ष के बाद उन्होंने यह मुकाम हासिल किया।
संघर्ष से भरा रहा सफर
चतरा जिले के सुइयाबार गांव की रहने वाली पूनम ने 2017 में कुश्ती की शुरुआत की थी। शुरुआत में ही चोट लगने के कारण उन्हें एक साल तक खेल से दूर रहना पड़ा।
वापसी के बाद उन्होंने 2018 और 2019 में स्कूल गेम्स में कांस्य पदक जीते, लेकिन लंबे समय तक कोई बड़ा खिताब नहीं जीत सकीं।
परिवार की चिंता, कोच का भरोसा
पूनम ने बताया कि प्रतियोगिता से पहले वह पूरी तरह फिट नहीं थीं और परिवार ने खेलने से मना भी किया था। लेकिन कोच और सपोर्ट स्टाफ के भरोसे ने उन्हें आगे बढ़ने की ताकत दी।
पढ़ाई के साथ खेल में संतुलन
पूनम पिछले कई वर्षों से रांची में रहकर अभ्यास कर रही हैं और साथ ही रांची विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक की पढ़ाई भी कर रही हैं।
अब अगला लक्ष्य
पूनम का अगला लक्ष्य जूनियर नेशनल ट्रायल्स के लिए क्वालीफाई करना है। उन्होंने कहा कि वह देश के लिए और मेडल जीतना चाहती हैं। पूनम ऑरन की यह जीत न सिर्फ एक खिलाड़ी की सफलता की कहानी है, बल्कि यह बताती है कि दृढ़ संकल्प और मेहनत से हर मुश्किल को हराया जा सकता है।





