जेपीएससी मुद्दे पर अनशनकारी छात्रों ने 60 दिनों के लिए स्थगित किया आंदोलन, बोले- जांच में ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो फिर शुरू होगा संघर्ष

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रांची, 19 अगस्त । झारखंड में जेपीएससी-जेएसएससी प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितता और भ्रष्टाचार के खिलाफ पिछले 26 दिनों से चल रहा छात्र आंदोलन बुधवार को फिलहाल स्थगित कर दिया गया। जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में 25 जुलाई से चल रहे आंदोलन के तहत 16 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे छात्रों ने सरकार को 60 दिनों का समय देते हुए अनशन समाप्त कर दिया। छात्रों ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन की समाप्ति नहीं, बल्कि सरकार को अपनी मांगों पर ठोस कार्रवाई करने का अवसर देने के लिए अस्थायी विराम है।

अनशनकारी छात्रों ने कहा कि सरकार की ओर से जेपीएससी-जेएसएससी सीजीएल सहित अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में सामने आई कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की बेहतर तरीके से जांच कराने का आश्वासन दिया गया है। इसी आश्वासन के आधार पर छात्रों ने अगले दो महीने तक सरकार की कार्रवाई देखने का फैसला किया है। छात्रों ने चेतावनी दी कि यदि 60 दिनों के भीतर उनकी मांगों की दिशा में अपेक्षित और ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को दोबारा शुरू किया जाएगा।

जूस पिलाकर कराया अनशन समाप्त

बुधवार को जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में आंदोलनकारी छात्रों के बीच मौजूद अनशनकारियों कोतवाली थाना प्रभारी सनोज चौधरी ने जूस पिलाकर अनशन समाप्त कराया। अनशनकारी छात्रा सबिता कुमारी, रूपेश कुमार और राहुल क्रांति को जूस पिलाकर आमरण अनशन तुड़वाया गया।

हालांकि अनशन समाप्त करने के बाद सबिता कुमारी समेत अन्य अनशनकारियों ने साफ कर दिया कि उनका संघर्ष खत्म नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि सरकार को दो महीने का समय दिया गया है और इस दौरान सरकार की ओर से उठाए जाने वाले कदमों पर नजर रखी जाएगी।

छात्रों का कहना है कि उनकी मूल मांग प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित धांधली और भ्रष्टाचार की निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जांच है। सरकार की ओर से जांच को लेकर जो आश्वासन दिया गया है, अब उसकी गंभीरता और परिणाम को देखा जाएगा।

‘मांगें पूरी नहीं हुईं तो फिर शुरू होगा आंदोलन’

आंदोलनकारी छात्र प्रतिनिधियों ने कहा कि 60 दिनों की मोहलत देना किसी भी तरह से संघर्ष से पीछे हटना नहीं है। यह सरकार को अपनी प्रतिबद्धता साबित करने का अवसर है। यदि निर्धारित अवधि में सरकार की ओर से छात्रों की मांगों के अनुरूप कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन को फिर से शुरू किया जाएगा।

छात्रों का कहना है कि जेपीएससी और जेएसएससी की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर लंबे समय से अभ्यर्थियों के बीच असंतोष है। ऐसे में केवल परीक्षाएं रद्द करना पर्याप्त नहीं है। दोषियों की पहचान और उनके खिलाफ कार्रवाई के साथ पूरी परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करना भी जरूरी है।

सीबीआई जांच की मांग पर कायम छात्र

रिफॉर्म मंच के प्रमुख छात्र प्रतिनिधियों ने कहा कि आंदोलनकारियों की सबसे प्रमुख मांग पूरे मामले की सीबीआई जांच है। छात्र नेता कुणाल प्रताप सिंह ने कहा कि सरकार फिलहाल जो कार्रवाई कर रही है, उसे दो महीने तक देखा जाएगा। उन्होंने कहा कि छात्रों की लड़ाई छात्रहित और भ्रष्टाचार के खिलाफ है और सरकार की कार्रवाई इसी दिशा में होनी चाहिए।

कुणाल प्रताप सिंह ने कहा कि यदि दो महीने बाद भी छात्रों को लगता है कि जांच निष्पक्ष और प्रभावी तरीके से आगे नहीं बढ़ रही है, तो छात्रों को फिर से एकजुट होने में देर नहीं लगेगी। उन्होंने कहा कि आंदोलनकारियों की मांगों को नजरअंदाज किया गया तो आंदोलन दोबारा उसी मजबूती के साथ शुरू किया जाएगा।

स्वतंत्र जांच की मांग

छात्रों का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए पूरे मामले की स्वतंत्र जांच आवश्यक है। उनके मुताबिक, केवल विभागीय या सीमित स्तर की जांच से अभ्यर्थियों के मन में उठ रहे सवालों का समाधान नहीं होगा।

छात्र प्रतिनिधियों ने कहा कि परीक्षा प्रक्रिया पर अभ्यर्थियों का भरोसा बहाल करने के लिए यह जरूरी है कि कथित गड़बड़ियों की जड़ तक पहुंचा जाए और जिन लोगों की भूमिका सामने आए, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार भी किया जाना चाहिए।

26वें दिन स्थगित हुआ आंदोलन

जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच के नेतृत्व में यह आंदोलन 25 जुलाई 2026 से जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में चल रहा था। आंदोलन के दौरान बड़ी संख्या में छात्र और प्रतियोगी परीक्षा के अभ्यर्थी शामिल हुए। आमरण अनशन भी लगातार 16 दिनों तक चला।

बुधवार को अनशन समाप्त होने के बाद मंच की ओर से आंदोलन में सहयोग करने वाले मीडिया, सामाजिक संगठनों और अन्य लोगों के प्रति आभार जताया गया। छात्र नेता पीयूष सिंह ने कहा कि रिफॉर्म मंच आगे भी छात्रों की समस्याओं और उनके अधिकारों के लिए सक्रिय रहेगा।

उन्होंने कहा कि छात्रों से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाने का सिलसिला जारी रहेगा और सरकार की आगामी कार्रवाई पर नजर रखी जाएगी।

मौके पर पीयूष कुमार, कुणाल प्रताप सिंह, उमेश प्रसाद, देवाशीष समेत बड़ी संख्या में छात्र और अभ्यर्थी मौजूद रहे। छात्रों ने एक बार फिर दोहराया कि 60 दिनों के बाद आंदोलन की दिशा सरकार की कार्रवाई तय करेगी।

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