जस्टिस यशवंत वर्मा ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को भेजा इस्तीफा, कैश कांड में आया था नाम, जानें पूरा मामला

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नई दिल्ली। जस्टिस यशवंत वर्मा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना त्यागपत्र राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को भेजा है।

जस्टिस वर्मा के खिलाफ पहले ही महाभियोग की प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी। Om Birla द्वारा जजेज इन्क्वायरी एक्ट के तहत जांच कमेटी का गठन किया गया था।

सुप्रीम कोर्ट में चुनौती खारिज

जस्टिस वर्मा ने इस जांच के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन अदालत ने उनकी याचिका खारिज कर दी थी।

तीन सदस्यीय जांच कमेटी का गठन

सुप्रीम कोर्ट ने 22 मार्च 2025 को इस मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी बनाई थी, जिसमें:

  • Sheel Nagu
  • G. S. Sandhawalia
  • Anu Sivaraman
    शामिल थे।

आग की घटना के बाद मिला था कैश

इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा ने राष्ट्रपति को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। इससे पहले, उनके आवास पर कथित तौर पर कैश मिलने को लेकर हुए विवाद के बाद, उनका दिल्ली हाई कोर्ट से वापस इलाहाबाद तबादला कर दिया गया था। उन्होंने 5 अप्रैल, 2025 को शपथ ली थी, और फिलहाल उनके खिलाफ आरोपों के संबंध में एक आंतरिक जांच चल रही है, जिसके चलते उन्हें संसद की ओर से पद से हटाए जाने की प्रक्रिया शुरू होने की भी संभावना है।

जस्टिस यशवंत वर्मा के दिल्ली स्थित सरकारी आवास से 15 मार्च 2025 को 500 रुपए के जले और अधजले नोट मिले थे। इसका एक वीडियो भी खूब वायरल हुआ था। इसके बाद न्यायमूर्ति वर्मा पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे। उन्होंने आरोपों से इनकार किया और उसे साजिश बताया था। हालांकि, मामले ने तूल पकड़ा, विवाद संसद तक पहुंच गया था।

सीजेआई के नेतृत्व में शुरू हुई थी इंटरनल जांच

वहीं इस मामले में भारत के मुख्य न्यायाधीश ने 22 मार्च 2025 को एक आंतरिक जांच शुरू की थी। जस्टिस वर्मा के खिलाफ आरोपों की जांच के लिए हाई कोर्ट के तीन न्यायाधीशों का पैनल भी बनाया था। हालांकि, बाद में सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम ने जस्टिस यशवंत वर्मा का तबादला इलाहाबाद हाई कोर्ट करने की सिफारिश की थी।

जस्टिस वर्मा का इलाहाबाद हाईकोर्ट में हुआ था ट्रांसफर

इसके बाद सरकार ने इस सिफारिश पर अपनी मुहर लगाई और वर्मा को इलाहाबाद हाई कोर्ट में कार्यभार संभालने के लिए कहा गया था। 5 अप्रैल 2025 को जस्टिस यशवंत वर्मा ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में न्यायाधीश के रूप में शपथ ग्रहण की थी। हालांकि, इलाहाबाद हाईकोर्ट में भी जस्टिस वर्मा के ट्रांसफर को लेकर सवाल उठाए गए। इस मुद्दे पर घमासान लगातार जारी था इसी बीच शुक्रवार को जस्टिस वर्मा ने इस्तीफा दे दिया। उन्होंने राष्ट्रपति को अपना इस्तीफा भेजा है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट में बढ़ा विवाद, अब जस्टिस वर्मा का इस्तीफा

कैश कांड मामले में नाम आने के बाद दिल्ली से जस्टिस वर्मा का ट्रांसफर इलाहाबाद उच्च न्यायालय में कर दिया गया। विधि मंत्रालय ने एक अधिसूचना में उनके ट्रांसफर की घोषणा की गई थी। इसके बाद जज यशवंत वर्मा इलाहाबाद हाईकोर्ट चले गए थे। उच्चतम न्यायालय के कोलेजियम ने जस्टिस वर्मा का स्थानांतरण करने की सिफारिश की थी। उस समय कहा गया था कि यह कदम होली की रात उक्त न्यायाधीश के आधिकारिक आवास में आग और कथित तौर पर नकदी मिलने के मामले में आंतरिक जांच के आदेश से अलग है।

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