रांची: झारखंड की राजधानी रांची में एक चौंकाने वाले खुलासे के बाद पुलिस मुख्यालय हरकत में आ गया है। कुख्यात गैंगस्टर प्रिंस खान के गुर्गे को सरकारी अंगरक्षक मिलने के मामले ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या है पूरा मामला?
जांच में सामने आया कि प्रिंस खान के करीबी राणा राहुल प्रताप को सरकारी सुरक्षा यानी अंगरक्षक मुहैया कराए गए थे।
इतना ही नहीं, वह गाड़ियों के काफिले के साथ चलता था और उसके साथ 3-4 अंगरक्षक भी देखे गए।
पुलिस के मुताबिक, राणा राहुल प्रताप कारोबारियों की रेकी कर उनके वीडियो गैंगस्टर तक पहुंचाता था। उसके पास हथियार का लाइसेंस भी था—जो अब जांच के दायरे में है।
अब राज्यभर में होगी समीक्षा
इस खुलासे के बाद झारखंड पुलिस मुख्यालय ने बड़ा कदम उठाया है।
अब राज्य के सभी जिलों में:
- VIP और VVIP को दिए गए अंगरक्षकों की पूरी समीक्षा होगी
- अंगरक्षकों की संख्या घटाने या बढ़ाने पर विचार
- जरूरत नहीं होने पर अंगरक्षक हटाए जाएंगे
- लंबे समय से तैनात कर्मियों का ट्रांसफर किया जाएगा
SSP-SP को भेजा गया निर्देश
पुलिस मुख्यालय ने सभी जिलों के SSP और SP को पत्र भेजकर विस्तृत जानकारी मांगी है।
रिपोर्ट में ये जानकारी देनी होगी:
- किस व्यक्ति को कितने अंगरक्षक मिले हैं
- कब से तैनाती है
- अंगरक्षकों के पास कौन-कौन से हथियार हैं
- सुरक्षा देने के आदेश में क्या कारण बताए गए थे
पहले भी मिलती रही हैं शिकायतें
सूत्रों के मुताबिक, पहले भी कई बार यह शिकायतें आई थीं कि:
- अंगरक्षक VIP के नाम पर धौंस दिखाते हैं
- अनुशासनहीनता और दबंगई के मामले सामने आते हैं
- कुछ अंगरक्षक लंबे समय तक एक ही व्यक्ति के साथ रहकर गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल हो जाते हैं
इन्हीं शिकायतों को देखते हुए अब यह व्यापक समीक्षा शुरू की गई है।
हत्या कांड से जुड़ा है मामला
यह पूरा मामला उस वक्त सामने आया जब रांची के एयरपोर्ट थाना क्षेत्र में एक होटल में फायरिंग के दौरान मनीष गोप की हत्या हुई थी।
जांच में गिरफ्तार आरोपी कुबेर ने पूछताछ में राणा राहुल प्रताप और कौशल पांडेय का नाम लिया, जो फिलहाल फरार हैं।
अब क्या होगा आगे?
पुलिस मुख्यालय ने रांची पुलिस से यह भी पूछा है कि:
- राणा राहुल प्रताप को अंगरक्षक किस आधार पर दिए गए?
- हथियार का लाइसेंस किन परिस्थितियों में मिला?
इन सवालों के जवाब के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
इस पूरे मामले ने झारखंड में VIP सुरक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अब पुलिस की इस समीक्षा के बाद यह साफ हो जाएगा कि किसे वास्तव में सुरक्षा की जरूरत है—और कौन इसका दुरुपयोग कर रहा था।





