गुरु पूर्णिमा पर प्रधानमंत्री मोदी का संदेश, गुरु के छह स्वरूपों का किया उल्लेख, जीवन में उनके आदर्श अपनाने का आह्वान

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नई दिल्ली, 29 जुलाई — प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए गुरु की महत्ता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि गुरु केवल ज्ञान देने तक सीमित नहीं होते, बल्कि वे अपने शिष्यों में सकारात्मक ऊर्जा का संचार कर उन्हें सुविचारों और सुसंस्कारों से परिपूर्ण बनाते हैं। प्रधानमंत्री ने सभी नागरिकों से गुरुजनों के आदर्शों को जीवन में अपनाने का आह्वान किया।

गुरु के छह स्वरूपों का उल्लेख

प्रधानमंत्री मोदी ने बुधवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक संस्कृत सुभाषित साझा किया—
“प्रेरकः सूचकश्चैव वाचको दर्शकस्तथा।
शिक्षकः बोधकश्चैव षडेते गुरवः स्मृताः॥”

इस सुभाषित के माध्यम से गुरु के छह स्वरूपों का वर्णन किया गया है। इसके अनुसार गुरु वह है जो जीवन में प्रेरणा देता है, सही दिशा की ओर संकेत करता है, ज्ञान प्रदान करता है, मार्गदर्शन करता है, शिक्षा देता है और आत्मबोध के जरिए व्यक्ति के विकास का मार्ग प्रशस्त करता है।

गुरु: ज्ञान के साथ संस्कारों के संवाहक

प्रधानमंत्री ने कहा कि गुरु का कार्य केवल पढ़ाना नहीं, बल्कि शिष्यों के व्यक्तित्व का निर्माण करना भी है। गुरु अपने अनुभव, विचार और मार्गदर्शन से शिष्यों में सकारात्मक सोच विकसित करते हैं और उन्हें सही जीवन मूल्यों से जोड़ते हैं।

गुरुजनों के आदर्श अपनाने की अपील

अपने संदेश में प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों से आह्वान किया कि वे अपने गुरुजनों के आदर्शों और शिक्षाओं को जीवन का आधार बनाएं। उन्होंने कहा कि गुरु के बताए मार्ग पर चलकर ही व्यक्ति सच्चे अर्थों में सफलता और आत्मविकास प्राप्त कर सकता है।

गुरु पूर्णिमा के अवसर पर प्रधानमंत्री का यह संदेश समाज में गुरु-शिष्य परंपरा की महत्ता और उसकी प्रासंगिकता को पुनः रेखांकित करता है।

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