भागलपुर, 02 सितंबर। नवगछिया की आस्था और गौरवशाली संस्कृति का प्रतीक ऐतिहासिक सैदपुर दुर्गा मंदिर एक बार फिर गंगा नदी के भीषण कटाव की जद में आ गया है। पिछले वर्ष जनआक्रोश और प्रशासनिक प्रयासों के बाद मंदिर को कटाव से बचाया गया था, लेकिन इस वर्ष गंगा के बढ़ते जलस्तर और तेज बहाव ने एक बार फिर मंदिर के अस्तित्व पर संकट खड़ा कर दिया है। स्थिति को लेकर स्थानीय ग्रामीणों और श्रद्धालुओं में भय के साथ प्रशासन के प्रति नाराजगी भी बढ़ रही है।
बढ़ते जलस्तर के साथ कटाव का खतरा गहराया
गंगा के जलस्तर में वृद्धि के साथ सैदपुर इलाके में कटाव का खतरा लगातार बढ़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि नदी की तेज धार मंदिर परिसर के आसपास की जमीन को लगातार प्रभावित कर रही है। ऐसे में यदि समय रहते मजबूत सुरक्षा उपाय नहीं किए गए तो ऐतिहासिक मंदिर को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है।
जियो बैग से सुरक्षा को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी
ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले वर्ष की स्थिति से सबक लेने के बावजूद अब तक मंदिर की सुरक्षा के लिए कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया। वर्तमान में कटाव प्रभावित हिस्से में महज जियो बैग डालकर सुरक्षात्मक कार्य किए गए हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि गंगा की तेज धारा के सामने ये जियो बैग पर्याप्त साबित नहीं हो रहे हैं और इनके बह जाने का खतरा बना हुआ है। ग्रामीण स्थायी और मजबूत कटावरोधी कार्य शुरू करने की मांग कर रहे हैं।
प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से तत्काल हस्तक्षेप की मांग
सैदपुर और आसपास के क्षेत्रों के श्रद्धालुओं ने जिला प्रशासन, स्थानीय विधायक, संबंधित विभागीय मंत्री और सांसद से मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि सैदपुर दुर्गा मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि पूरे नवगछिया अनुमंडल की आस्था और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ी ऐतिहासिक धरोहर है।
ग्रामीणों के अनुसार, मंदिर को बचाने के लिए केवल अस्थायी उपायों के बजाय दीर्घकालिक सुरक्षा योजना तैयार करने की जरूरत है।
स्थायी बोल्डर क्रेटिंग की उठी मांग
स्थानीय समाजसेवियों और ग्रामीणों ने मंदिर परिसर को सुरक्षित रखने के लिए मजबूत पक्का बोल्डर क्रेटिंग और अन्य स्थायी सुरक्षात्मक कार्य शुरू करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते कटावरोधी काम नहीं कराया गया तो गंगा की धार इस ऐतिहासिक धरोहर को अपने आगोश में ले सकती है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से आपदा आने का इंतजार करने के बजाय तत्काल युद्ध स्तर पर सुरक्षा कार्य शुरू करने की अपील की है, ताकि सैदपुर दुर्गा मंदिर को गंगा में विलीन होने से बचाया जा सके।






