ऊर्जा आपूर्ति मजबूत होगी, दो दिनों में भारत पहुंचेंगे 92 हजार टन गैस से लदे जहाज

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नई दिल्ली। देश में घरेलू रसोई गैस आपूर्ति को स्थिर रखने के लिए दो भारतीय जहाज जल्द ही गुजरात के बंदरगाहों पर पहुंचने वाले हैं। इनमें कुल 92,000 मीट्रिक टन लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) लदी हुई है और ये 16-17 मार्च को गुजरात के प्रमुख पोर्ट्स पर डॉक करेंगे। पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के अनुसार इन जहाजों को प्राथमिकता के आधार पर बंदरगाह पर लगाने की व्यवस्था की गई है ताकि गैस आपूर्ति प्रभावित न हो। इससे रसोई गैस की उपलब्धता बनाए रखने और संभावित संकट को कम करने में मदद मिलेगी।

मंत्रालय के अधिकारी राजेश कुमार सिन्हा ने पत्रकार वार्ता में बताया कि महानिदेशालय नौवहन भारतीय ध्वज वाले जहाजों और उन पर तैनात भारतीय नाविकों की स्थिति पर लगातार नज़र रखे हुए है। इसके लिए जहाज मालिकों, आरपीएसएन एजेंसियों और भारतीय राजनयिक मिशनों के साथ समन्वय किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि पिछले 24 घंटों में पोत परिवहन के कंट्रोल रूप में पिछले 24 घंटों में 312 फोन कॉल और 460 ई-मेल प्राप्त हुए हैं। ये संदेश नाविकों, उनके परिजनों और समुद्री क्षेत्र से जुड़े हैं। सभी कॉल और इमेल के जवाब दिए गए है। कुल मिलाकर अब तक 5000 कॉल और 5000 ई-मेल के जवाब दिए गए हैं।

सिन्हा ने बताया कि फ़ारस की खाड़ी क्षेत्र में मौजूद सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं और पिछले 24 घंटों में उनके साथ किसी भी तरह की अप्रिय घटना की कोई रिपोर्ट नहीं मिली है। होर्मुज जलडमरूमध्य के पश्चिम में 24 भारतीय-ध्वज वाले जहाज़ मौजूद थे। इनमें से दो जहाज़— शिवालिक और नंदा देवी जो दोनों एलपीजी कैरियर है, आज तड़के सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर चुके हैं और अब भारत की ओर बढ़ रहे हैं।

इन जहाज़ों में लगभग 92,700 मीट्रिक टन एलपीजी लदी हुई है। शिवालिक के मुंद्रा पोर्ट पर 16 मार्च को पहुंचने की संभावना है और नंदा देवी जहाज के कांडला बंदरगाह पर 17 मार्च को पहुंचने की उम्मीद है। इसके परिणामस्वरूप अब फारस की खाड़ी में 22 भारतीय-ध्वज वाले जहाज़ शेष हैं, जिन पर कुल 611 भारतीय नाविक सवार हैं।

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