उत्तरकाशी जिले में पहली बार कैमरे में कैद हुआ दुर्लभ पक्षी सिरकीर मालकोहा

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देहरादून। उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में पहली बार दुर्लभ पक्षी सिरकीर मालकोहा की मौजूदगी दर्ज की गई है। अपर यमुना वन प्रभाग बड़कोट की वन विभागीय टीम ने दिसंबर माह में बड़कोट के आसपास के क्षेत्रों में इस पक्षी को अपने कैमरे में कैद किया। इससे पूर्व अक्टूबर माह में हिमालयन सिरो की भी उपस्थिति दर्ज की गई थी।

वन क्षेत्राधिकारी रवांई शेखर सिंह राणा ने बताया कि सिरकीर मालकोहा लंबी पूंछ वाली प्रायः जैतून-भूरे रंग की चिड़िया है, जिसकी पहचान इसकी अनोखी घुमावदार लाल चोंच से होती है। यह प्रजाति सामान्यतः उत्तराखंड के मैदानी जिलों में पाई जाती है और शुष्क झाड़ीदार वनों तथा एक हजार मीटर (यानी करीब 3,280 फीट) से नीचे की खुली वनभूमि में इसका आवास माना जाता है। ऐसे में बड़कोट क्षेत्र में इसका दिखना दुर्लभ होने के साथ-साथ शोध का महत्वपूर्ण विषय है।

वनाधिकारी राणा ने बताया कि इस मौसम में इस पक्षी का दिखाई देना विशेष महत्व रखता है, क्योंकि पक्षियां अन्य जीवों की तुलना में जलवायु परिवर्तन के प्रति अत्यंत संवेदनशील होती हैं। उनका स्थानांतरण और उपस्थिति पर्यावरणीय बदलावों का संकेत देती है। उन्होंने कहा कि जैव विविधता के लिहाज़ से उत्तरकाशी जनपद अत्यंत समृद्ध है। पक्षी विशेषज्ञों ने अब तक जिले में लगभग 370 प्रजातियों की चिड़ियां रिकार्ड की जा चुकी हैं। सिरकीर मालकोहा के दर्ज होने से जिले की पक्षी प्रजातियों की सूची में एक और इजाफा हुआ है।

वन विभाग का मानना है कि अभी भी जनपद में कई अन्य दुर्लभ पक्षी प्रजातियों की मौजूदगी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। यह खोज उत्तरकाशी की जैव विविधता को समझने और संरक्षण के प्रयासों को और मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है। इससे पूर्व बीते अक्टूबर माह में अपर यमुना वन प्रभाग की शीतकालीन लंबी दूरी गश्त के दौरान वन विभाग की टीम को हिमालयन सिरो दिखा था। यह एक शाकाहारी, मध्यम आकार का स्तनपायी है, जो बकरी, गाय और गधे का मिश्रण जैसा दिखता है।

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