नई दिल्ली। कोल इंडिया की सहयोगी कंपनी सेंट्रल माइन प्लानिंग एंड डिजाइन इंस्टीट्यूट (सीएमपीडीआई) लिमिटेड के शेयरों ने आज स्टॉक मार्केट में कमजोर शुरुआत कर अपने आईपीओ निवेशकों को निराश कर दिया। आईपीओ के तहत कंपनी के शेयर 172 रुपये के भाव पर जारी किए गए थे। आज बीएसई पर इसकी लिस्टिंग 162.80 रुपये के स्तर पर और एनएसई पर 160 रुपये के स्तर पर हुई। इस तरह इस शेयर ने स्टॉक मार्केट में अपनी शुरुआत ही करीब सात प्रतिशत डिस्काउंट के साथ की।
लिस्टिंग के बाद खरीदारी का सपोर्ट मिलने से कंपनी के शेयर उछल कर 168.70 रुपये के स्तर तक पहुंचे, लेकिन इसके बाद बिकवाली का दबाव बन जाने के कारण ये लुढ़क कर 152.30 रुपये के स्तर गिर गए। पूरे दिन के कारोबार के बाद सीएमपीडीआई के शेयर बीएसई पर 154.05 रुपये के स्तर पर और एनएसई पर 154.06 रुपये के स्तर पर बंद हुए। इस तरह पहले दिन के कारोबार में कंपनी के आईपीओ निवेशकों को 10.40 प्रतिशत से अधिक का नुकसान हो गया।
सीएमपीडीआई का 1,842.12 करोड़ रुपये का आईपीओ 20 से 24 मार्च के बीच सब्सक्रिप्शन के लिए खुला था। इस आईपीओ को निवेशकों की ओर से फीका रिस्पॉन्स मिला था, जिसके कारण ये ओवरऑल 1.05 गुना सब्सक्राइब हो सका था। इनमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (क्यूआईबी) के लिए रिजर्व पोर्शन 3.48 गुना (एक्स एंकर) सब्सक्राइब हुआ था। नॉन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (एनआईआई) के लिए रिजर्व पोर्शन में सिर्फ 0.35 गुना सब्सक्रिप्शन आया था। इसी तरह रिटेल इन्वेस्टर्स के लिए रिजर्व पोर्शन भी सिर्फ 0.35 गुना सब्सक्राइब हो सका था। इसके अलावा एंप्लॉयीज के लिए रिजर्व पोर्शन सिर्फ 0.21 गुना भरा था, जबकि शेयर होल्डर्स के लिए रिजर्व पोर्शन में 0.36 गुना सब्सक्रिप्शन आया था। इस आईपीओ के तहत दो रुपये फेस वैल्यू वाले 10.71 करोड़ शेयर ऑफर फॉर सेल विंडो के जरिये बेचे गए हैं।
कंपनी की वित्तीय स्थिति की बात करें, तो कैपिटल मार्केट रेगुलेटर सेबी के पास जमा कराए गए ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (डीआरएचपी) में किए गए दावे के मुताबिक इसकी वित्तीय सेहत लगातार मजबूत हुई है। वित्त वर्ष 2022-23 में कंपनी को 296.66 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हुआ था, जो अगले वित्त वर्ष 2023-24 में बढ़ कर 503.23 करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 2024-25 में उछल कर 666.91 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। मौजूदा वित्त वर्ष के पहले नौ महीने यानी अप्रैल से 31 दिसंबर 2025 तक कंपनी को 425.36 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हो चुका है।
इस दौरान कंपनी की राजस्व प्राप्ति में भी लगातार बढ़ोतरी हुई। वित्त वर्ष 2022-23 में इसे 1,398.78 करोड़ का कुल राजस्व प्राप्त हुआ, जो वित्त वर्ष 2023-24 में बढ़ कर 1,770.18 करोड़ और वित्त वर्ष 2024-25 में उछल कर 2,177.53 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। मौजूदा वित्त वर्ष के पहले नौ महीने यानी अप्रैल से 31 दिसंबर 2025 तक कंपनी को 1,543.93 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हो चुका है।
इस अवधि में कंपनी पर लदे कर्ज का बोझ भी लगातार बढ़ता गया। वित्त वर्ष 2022-23 के अंत में कंपनी पर 1,074.85 करोड़ रुपये के कर्ज का बोझ था, जो वित्त वर्ष 2023-24 में बढ़ कर 1,448.81 करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 2024-25 में उछल कर 1,899.05 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। मौजूदा वित्त वर्ष के पहले नौ महीने यानी अप्रैल से 31 दिसंबर 2025 तक की बात करें, तो इस दौरान कंपनी पर लदे कर्ज का बोझ 2,010.98 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया।
इस अवधि में कंपनी के नेटवर्थ में भी बढ़ोतरी हुई। वित्त वर्ष 2022-23 में ये 1,217.65 करोड़ रुपये के स्तर पर था, जो 2023-24 में बढ़ कर 1,591.61 करोड़ रुपये हो गया। इसी तरह 2024-25 में कंपनी का रिजर्व और सरप्लस 2,041.85 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। मौजूदा वित्त वर्ष के पहले नौ महीने यानी अप्रैल से 31 दिसंबर 2025 तक ये 2,153.78 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया।
इसी तरह ईबीआईटीडीए (अर्निंग बिफोर इंट्रेस्ट, टैक्सेज, डिप्रेशिएशंस एंड एमॉर्टाइजेशन) 2022-23 में 395.65 करोड़ रुपये के स्तर पर था, जो 2023-24 में बढ़ कर 764.44 करोड़ रुपये और 2024-25 में 915.71 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। मौजूदा वित्त वर्ष के पहले नौ महीने यानी अप्रैल से 31 दिसंबर 2025 तक ये 593.85 करोड़ रुपये के स्तर पर था।





