रांची, 31 अगस्त । झारखंड उच्च न्यायालय ने सिविल जज जूनियर डिवीजन नियुक्ति प्रक्रिया रद्द करने के आदेश को चुनौती देने वाली तीन याचिकाओं को सुनवाई के लिए एकल पीठ में भेजने का निर्देश दिया है। मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने सोमवार को सुनवाई के दौरान यह आदेश दिया।
एकल पीठ में चल रहे समान मामले का दिया गया हवाला
सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि याचिकाकर्ता अभी न्यायिक अधिकारी नियुक्त नहीं हुए हैं और उनकी नियुक्ति प्रक्रिया जारी थी। इसी तरह का एक मामला पहले से ही उच्च न्यायालय की एकल पीठ के समक्ष लंबित है। ऐसे में समान प्रकृति के इन मामलों को भी एकल पीठ में भेजने का आग्रह किया गया।
राज्य सरकार और झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की ओर से भी इस आग्रह पर कोई आपत्ति नहीं जताई गई। इसके बाद खंडपीठ ने तीनों याचिकाओं को सुनवाई के लिए एकल पीठ में भेजने का निर्देश दिया।
विज्ञापन संख्या 22/2023 को दी गई है चुनौती
प्रार्थियों ने सिविल जज जूनियर डिवीजन नियुक्ति प्रक्रिया, विज्ञापन संख्या 22/2023 को चुनौती दी है। मामले में आदित्य भास्कर और आयुष कुमार वर्मा की ओर से याचिकाएं दाखिल की गई हैं। प्रार्थियों की ओर से अधिवक्ता अनुराग कश्यप, अधिवक्ता अभय आनंद और अधिवक्ता सोनल ने अदालत में पक्ष रखा।
टीडीपीएल से जुड़ी परीक्षाएं रद्द करने का फैसला
उल्लेखनीय है कि सीआईडी जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर राज्य सरकार ने 18 अगस्त की देर रात उन सभी परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा की थी, जिनमें टीडीपीएल शामिल रहा था। इसके साथ ही वर्ष 2014 से आयोजित सभी नियुक्ति परीक्षाओं में संभावित अनियमितताओं को देखते हुए जांच कराने की भी घोषणा की गई थी।
22 परीक्षाएं रद्द, छह की प्रक्रिया स्थगित
सरकार की घोषणा के बाद कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग ने परीक्षाएं रद्द करने, परीक्षा प्रक्रिया स्थगित करने और जांच कराने से संबंधित अधिसूचना जारी की।
अधिसूचना के अनुसार 22 परीक्षाओं को रद्द किया गया है, जबकि छह परीक्षाओं की प्रक्रिया स्थगित की गई है। इसके अलावा 17 परीक्षाओं को जांच के दायरे में रखा गया है।






