पटना। आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु जग्गी वासुदेव शुक्रवार शाम तीन दिवसीय बिहार दौरे पर पटना पहुंचे। राजधानी पहुंचने के बाद उन्होंने मुख्यमंत्री आवास में बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से शिष्टाचार मुलाकात की। मुख्यमंत्री ने पुष्पगुच्छ भेंटकर सद्गुरु का स्वागत किया और इस मुलाकात को आत्मीय, प्रेरणादायी एवं सार्थक बताया।
सांस्कृतिक विरासत और जनकल्याण के मुद्दों पर हुई चर्चा
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बताया कि बैठक के दौरान बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के साथ-साथ जनकल्याण से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि सद्गुरु के विचार समाज में सकारात्मक परिवर्तन, नैतिक मूल्यों के संवर्धन और जनजागरण के लिए प्रेरणास्रोत हैं।
ईशा फाउंडेशन की परियोजनाओं की हुई समीक्षा
बैठक में ईशा फाउंडेशन द्वारा बिहार में संचालित सामाजिक, पर्यावरणीय और जनहित से जुड़े कार्यों की समीक्षा की गई। साथ ही भविष्य में राज्य में संचालित की जाने वाली विभिन्न परियोजनाओं पर भी विचार-विमर्श हुआ।
पर्यावरण संरक्षण और जनभागीदारी पर जोर
मुख्यमंत्री और सद्गुरु के बीच पर्यावरण संरक्षण, जल एवं प्राकृतिक संसाधनों के संवर्धन, आध्यात्मिक जागरूकता, जनभागीदारी और नागरिक सुविधाओं से जुड़े कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने के विषय पर भी चर्चा हुई। दोनों ने समाज के समग्र विकास में सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।
तीन दिनों तक विभिन्न कार्यक्रमों में होंगे शामिल
सद्गुरु जग्गी वासुदेव का यह बिहार का पहला प्रमुख सार्वजनिक दौरा है, जो 26 जून से 28 जून तक चलेगा। इस दौरान वह राज्य सरकार के प्रतिनिधियों, विभिन्न सामाजिक संगठनों, शिक्षाविदों, युवाओं और ईशा फाउंडेशन के स्वयंसेवकों के साथ संवाद करेंगे। साथ ही आध्यात्मिक जीवन, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सहभागिता जैसे विषयों पर अपने विचार साझा करेंगे।
27 जून को बापू सभागार में होगा ‘एन इवनिंग विद सद्गुरु’
दौरे का मुख्य आकर्षण 27 जून की शाम आयोजित होने वाला ‘एन इवनिंग विद सद्गुरु’ कार्यक्रम होगा। राजधानी स्थित बापू सभागार में शाम 6:30 बजे से आयोजित इस सार्वजनिक सत्संग में बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की संभावना है। कार्यक्रम के लिए पूर्व पंजीकरण अनिवार्य किया गया है और सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
15 वर्ष से अधिक आयु के पंजीकृत प्रतिभागियों को मिलेगा प्रवेश
ईशा फाउंडेशन के प्रतिनिधियों के अनुसार, कार्यक्रम में 15 वर्ष या उससे अधिक आयु के पंजीकृत प्रतिभागियों को ही प्रवेश दिया जाएगा। देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले लोगों की सुविधा के लिए कार्यक्रम के दौरान हिंदी अनुवाद की भी व्यवस्था की गई है।
आध्यात्मिकता और जीवन प्रबंधन पर साझा करेंगे विचार
आयोजकों का कहना है कि यह कार्यक्रम आध्यात्मिकता, जीवन प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक उत्तरदायित्व जैसे विषयों पर सद्गुरु के विचारों को सुनने का महत्वपूर्ण अवसर होगा। इससे युवाओं और समाज के विभिन्न वर्गों को प्रेरणा मिलने की उम्मीद है।






