विदेशी नौकरी का झांसा देने वाले एजेंटों पर पुलिस सख्त, नेटवर्क की जांच शुरू

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गोपालगंज। तेजी से बदलते डिजिटल दौर में साइबर अपराध अब केवल ऑनलाइन ठगी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह मानव तस्करी जैसे संगठित अपराध का नया चेहरा बनता जा रहा है। इसी गंभीर खतरे को देखते हुए बिहार पुलिस अकादमी, राजगीर में आयोजित साइबर गुलामी विषय पर 100 से अधिक पुलिस पदाधिकारियों को एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण देकर लौटे पुलिस अधीक्षक विनय तिवारी ने जिले में साइबर अपराध के खिलाफ व्यापक अभियान छेड़ने का संकेत दिया है।

प्रशिक्षण के दौरान साइबर अपराध के विभिन्न प्रकार, अपराधियों की बदलती कार्यशैली तथा उनसे निपटने के लिए पुलिस की प्रभावी रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई। विशेष रूप से विदेश भेजने के नाम पर सक्रिय फर्जी एजेंटों के नेटवर्क को चिन्हित कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की आवश्यकता पर बल दिया गया।

एसपी ने बताया कि साइबर ठग अब ग्रामीण क्षेत्रों के भोले-भाले युवाओं को विदेश में नौकरी दिलाने का झांसा देकर मोटी रकम वसूलते हैं और फिर उन्हें ऐसे देशों में भेज दिया जाता है, जहां पहुंचने के बाद उनसे बंधक बनाकर जबरन काम कराया जाता है।

उन्होंने कहा कि साइबर अपराध ऐसे अपराध होते हैं जो कम्प्यूटर, इंटरनेट या मोबाइल टेक्नोलॉजी का उपयोग करके व्यक्तियों, कंपनियों या संस्थानों के प्रति किए जाते हैं। साइबर अपराधी सोशल नेटवर्किंग साइटों, ईमेल, चैट रूम, नकली सॉफ्टवेयर, वेबसाइटों इत्यादि जैसे प्लेटफॉर्मों का उपयोग पीड़ितों पर हमला करने के लिए करते हैं। इससे सभी को बचने की जरूरत है।यह पूरा गिरोह साइबर माध्यमों का इस्तेमाल कर युवाओं को अपने जाल में फंसाता है, जिससे पीड़ितों को न केवल आर्थिक नुकसान होता है बल्कि वे मानसिक और शारीरिक शोषण के भी शिकार बन जाते हैं।

एसपी ने कहा कि इसे ही साइबर गुलामी का नया रूप माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिले में ऐसे कई फर्जी एजेंटों के खिलाफ पहले भी कार्रवाई की जा चुकी है और आगे भी इनके नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे। प्रशिक्षण देकर लौटने के बाद पुलिस अधीक्षक ने जिले में साइबर सेल सहित विभिन्न थानों में पदस्थापित पुलिस पदाधिकारियों को इस विषय पर विशेष प्रशिक्षण दिया।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित इस सत्र में सभी थाना प्रभारियों को निर्देशित किया गया कि वे अपने-अपने क्षेत्र में सक्रिय संदिग्ध एजेंटों की पहचान कर तत्काल कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करें। इसके साथ ही आम जनता को जागरूक करने पर भी विशेष जोर दिया गया। एसपी ने कहा कि पुलिस की कार्रवाई तभी प्रभावी होगी जब लोग स्वयं भी सतर्क रहेंगे। बिना किसी आधिकारिक सत्यापन के विदेश भेजने के नाम पर पैसे लेने वाले एजेंटों से दूर रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल स्थानीय थाना या साइबर सेल को दें। पुलिस अब साइबर अपराध के इस नए रूप के खिलाफ कार्रवाई करने की तैयारी में है, ताकि जिले के युवाओं को डिजिटल ठगी और साइबर गुलामी के जाल में फंसने से बचाया जा सके। पुलिस प्रशासन ने साफ कर दिया है कि ऐसे अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी।

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