ब्रासीलिया (ब्राजील), 26 अक्टूबर । ब्राजील के मौजूदा राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला डा सिल्वा ने एक बार फिर चुनाव जीत लिया है। वह चौथी बार देश के राष्ट्रपति निर्वाचित हुए हैं। 80 वर्षीय वामपंथी नेता और पूर्व फैक्टरी कर्मचारी लूला ने रविवार को हुए कड़े मुकाबले में फ्लेवियो बोल्सोनारो को शिकस्त दी। पहले दौर में दोनों उम्मीदवारों के बीच कड़ी टक्कर रही थी।
ब्राजील के प्रमुख अखबार फोल्हा दे एस. पाउलो और सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, 99.77 प्रतिशत मतों की गिनती पूरी होने पर दूसरे दौर में लूला को 51.76 प्रतिशत वैध वोट मिले, जबकि फ्लेवियो बोल्सोनारो को 48.24 प्रतिशत वोट प्राप्त हुए।
महंगाई, अपराध और भ्रष्टाचार रहे प्रमुख चुनावी मुद्दे
लूला की यह जीत ऐसे चुनाव अभियान के बाद मिली, जिसमें महंगाई, अपराध और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे प्रमुखता से छाए रहे। फ्लेवियो बोल्सोनारो ने अपने प्रचार अभियान में अपराध के खिलाफ सख्त रुख अपनाने और खाद्य पदार्थों की कीमतें कम करने का वादा किया था। वहीं, लूला को महंगाई और सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं के बीच मतदाताओं का समर्थन हासिल करने के लिए कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा।
दोनों उम्मीदवारों के परिवारों और सहयोगियों से जुड़े भ्रष्टाचार के आरोप भी चुनावी बहस का हिस्सा रहे। सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, 1989 में प्रत्यक्ष राष्ट्रपति चुनाव की वापसी के बाद यह पहली बार है, जब पहले दौर में दूसरे स्थान पर रहने वाला उम्मीदवार अंतिम दौर में जीत दर्ज करने में सफल रहा है।
2003 से 2010 तक भी संभाल चुके हैं सत्ता
लूला ने वर्ष 2003 से 2010 तक लगातार दो कार्यकाल में ब्राजील का नेतृत्व किया था। उन्होंने 1970 के दशक में श्रमिक नेता के रूप में अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की और बाद में वर्कर्स पार्टी की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
भ्रष्टाचार के मामलों में दोषी ठहराए जाने के बाद लूला को एक साल से अधिक समय जेल में बिताना पड़ा था। हालांकि, बाद में उनकी दोषसिद्धि रद्द कर दी गई। इसके बाद उन्होंने राजनीति में वापसी की और राष्ट्रपति पद तक पहुंचे।
विदेश नीति में ब्राजील की संप्रभुता पर जोर
सीएनएन के विश्लेषण के अनुसार, लूला की जीत का प्रभाव ब्राजील की सीमाओं से बाहर भी देखने को मिल सकता है। उनके नेतृत्व में लैटिन अमेरिका का सबसे बड़ा देश अधिक स्वतंत्र विदेश नीति अपनाने पर जोर दे सकता है।
लूला ने ब्राजील की संप्रभुता को प्राथमिकता देने के साथ विकासशील देशों के समूह ‘ग्लोबल साउथ’ और चीन के साथ करीबी संबंधों की वकालत की है। ऐसे में उनकी जीत से ब्राजील की अंतरराष्ट्रीय प्राथमिकताओं और वैश्विक साझेदारियों पर ध्यान बना रहेगा।
बोल्सोनारो परिवार के राजनीतिक आंदोलन को झटका
लूला की जीत को बोल्सोनारो परिवार के राजनीतिक आंदोलन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। फ्लेवियो बोल्सोनारो अपने पिता और पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो की उस कोशिश को आगे बढ़ाने में सफल नहीं हो सके, जिसमें 2022 के चुनाव में लूला को हराने का प्रयास किया गया था।
इस नतीजे के साथ ब्राजील की राजनीति में लूला का प्रभाव एक बार फिर स्थापित हुआ है। हालांकि, महंगाई, अपराध और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे आने वाले समय में उनकी सरकार के लिए महत्वपूर्ण बने रहेंगे।






