राज्यसभा में विपक्ष की कमान फिर खरगे के हाथ, कर्नाटक से पुनर्निर्वाचन के बाद नेता प्रतिपक्ष घोषित किया गया

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नई दिल्ली। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को कर्नाटक से पुनर्निर्वाचित होने के बाद एक बार फिर राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता प्रदान कर दी गई है। राज्यसभा सचिवालय द्वारा जारी संसदीय बुलेटिन के अनुसार, सभापति एवं उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने उन्हें 26 जून 2026 से प्रभावी रूप से इस पद की मान्यता दी है।

कार्यकाल खत्म होने के बाद फिर मिली जिम्मेदारी

संसदीय बुलेटिन के मुताबिक, खरगे का पिछला राज्यसभा कार्यकाल 25 जून को समाप्त हो गया था, जिसके साथ ही नेता प्रतिपक्ष के रूप में उनकी मान्यता भी खत्म हो गई थी। कर्नाटक से दोबारा निर्वाचित होने के बाद उन्हें फिर से यह जिम्मेदारी सौंपी गई है।

संसद में दिलाई गई शपथ

सोमवार को संसद भवन स्थित सभापति कक्ष में उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने मल्लिकार्जुन खरगे को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ दिलाई। इस मौके पर केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा, किरेन रिजिजू, उपसभापति हरिवंश, सोनिया गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।

दूसरी बार राज्यसभा सदस्य बने खरगे

83 वर्षीय मल्लिकार्जुन खरगे वर्ष 2020 में पहली बार राज्यसभा के सदस्य बने थे। अब वे लगातार दूसरी बार कर्नाटक से उच्च सदन के लिए निर्वाचित हुए हैं।

पांच दशक से अधिक लंबा राजनीतिक सफर

खरगे का राजनीतिक जीवन 50 वर्षों से अधिक का रहा है। उन्होंने 1972 में पहली बार कर्नाटक विधानसभा चुनाव जीतकर राजनीति में कदम रखा और नौ बार विधायक रहे। उन्होंने कर्नाटक सरकार में कई महत्वपूर्ण मंत्रालय संभाले और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष भी रहे।

केंद्र और लोकसभा में भी निभाई अहम भूमिका

वर्ष 2009 और 2014 में वे गुलबर्गा से लोकसभा सांसद चुने गए। यूपीए सरकार में उन्होंने रेल मंत्री और श्रम एवं रोजगार मंत्री के रूप में काम किया। 2014 से 2019 तक वे लोकसभा में कांग्रेस के नेता रहे और अक्टूबर 2022 में कांग्रेस अध्यक्ष बने।

राज्यसभा के बदले समीकरण

हाल ही में 10 राज्यों की 27 सीटों पर हुए राज्यसभा चुनाव के बाद उच्च सदन के समीकरण में बदलाव देखने को मिला है। एनडीए की संख्या करीब 152 तक पहुंच गई है, जबकि विपक्षी INDIA गठबंधन के पास लगभग 64 सदस्य हैं।

दो-तिहाई बहुमत से अभी दूर

राज्यसभा में दो-तिहाई बहुमत के लिए 163 सदस्यों का समर्थन जरूरी होता है। बीजेडी (5 सदस्य) और वाईएसआरसीपी (7 सदस्य) फिलहाल किसी गठबंधन का हिस्सा नहीं हैं, लेकिन कई मौकों पर केंद्र सरकार का समर्थन करते रहे हैं।

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