कोलकाता, 17 अक्टूबर । पश्चिम बंगाल में शनिवार को महासप्तमी के अवसर पर दुर्गा पूजा की धार्मिक परंपराएं श्रद्धा और उल्लास के साथ शुरू हुईं। सुबह से ही कोलकाता, नादिया, सिलीगुड़ी और बीरभूम सहित राज्य के विभिन्न इलाकों में गंगा, हुगली और महानंदा नदियों के घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। ‘कोलाबोऊ स्नान’ यानी ‘नवपत्रिका स्नान’ के साथ दुर्गा पूजा के प्रमुख अनुष्ठानों की शुरुआत हुई।
गंगा घाटों पर विधि-विधान से हुआ नवपत्रिका स्नान
कोलकाता में गंगा के विभिन्न घाटों पर सुबह से ही पुरोहितों और पूजा आयोजकों ने पारंपरिक विधि-विधान के साथ नवपत्रिका को पवित्र जल में स्नान कराया। इसके बाद ढाक की गूंज और शंखध्वनि के बीच शोभायात्रा निकालकर नवपत्रिका को पूजा पंडालों में स्थापित किया गया।
बंगाल की दुर्गा पूजा परंपरा में महासप्तमी के दिन नवपत्रिका स्नान का विशेष महत्व है। इस अनुष्ठान के साथ पूजा के प्रमुख कार्यक्रम आगे बढ़ते हैं और श्रद्धालु मां दुर्गा के दर्शन तथा पूजन में जुट जाते हैं।
नौ वनस्पतियों से जुड़ी है नवपत्रिका की परंपरा
नवपत्रिका में केले के पौधे समेत नौ प्रकार की वनस्पतियां शामिल होती हैं। इसे नवदुर्गा के विभिन्न रूपों और प्रकृति की उर्वरता का प्रतीक माना जाता है। महासप्तमी के दिन नवपत्रिका को स्नान कराने के बाद विधि-विधान से पूजा पंडाल में स्थापित किया जाता है।
दुर्गा पूजा की तैयारियों के बीच कोलकाता के थोक फूल बाजारों में भी खरीदारों की भारी भीड़ देखने को मिली। पूजा आयोजक और श्रद्धालु फूलों सहित अन्य पूजन सामग्री की खरीदारी में जुटे रहे।
उत्तर से दक्षिण बंगाल तक उत्सव का माहौल
उत्तर बंगाल से लेकर दक्षिण बंगाल के ग्रामीण और शहरी इलाकों तक दुर्गा पूजा का उत्साह चरम पर है। सिलीगुड़ी में महानंदा नदी के किनारे बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने नवपत्रिका स्नान का अनुष्ठान संपन्न किया।
वहीं, बीरभूम जिले के हातसेरांडी गांव में पारंपरिक वेशभूषा में सजे ग्रामीणों ने ढाक की थाप के बीच भव्य जुलूस निकाला। नादिया जिले में हुगली नदी के घाटों पर भी सुबह से श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।
नवपत्रिका स्नान और स्थापना के अनुष्ठानों के साथ ही राज्य भर में दुर्गा पूजा के प्रमुख धार्मिक कार्यक्रमों ने गति पकड़ ली। पूजा पंडालों में मां दुर्गा के दर्शन और पूजन के लिए श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ने लगी है।






