मगध-आम्रपाली टेरर फंडिंग मामले में सुभान मियां को झारखंड हाई कोर्ट से जमानत, साढ़े छह साल से जेल में रहने का दिया हवाला

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रांची, 26 अक्टूबर । झारखंड के चतरा जिले के टंडवा स्थित मगध और आम्रपाली कोल परियोजनाओं से जुड़े टेरर फंडिंग मामले में सजा काट रहे सुभान मियां को झारखंड हाई कोर्ट से जमानत मिल गई है। न्यायमूर्ति रंगन मुखोपाध्याय की अदालत ने सुभान मियां की ओर से दायर अंतरिम आवेदन पर सुनवाई करते हुए यह राहत दी। सुभान मियां ने साढ़े छह साल से अधिक समय तक जेल में रहने का हवाला देते हुए जमानत की मांग की थी।

सुनवाई के दौरान राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की ओर से वरीय अधिवक्ता अमित कुमार दास और अधिवक्ता सौरभ कुमार ने पक्ष रखा। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने सुभान मियां को जमानत देने का आदेश दिया।

एनआईए की विशेष अदालत ने 12 दोषियों को सुनाई थी सजा

इस मामले में 18 अगस्त को रांची स्थित एनआईए की विशेष अदालत ने 12 दोषियों को आठ से दस साल तक की सजा सुनाई थी। अदालत ने दोषियों पर 40 हजार से 90 हजार रुपये तक का जुर्माना भी लगाया था।

इससे पहले इसी मामले में सजा पाए सात अन्य दोषियों को भी झारखंड हाई कोर्ट से जमानत मिल चुकी है। सुभान मियां को जमानत मिलने के बाद इस मामले में राहत पाने वाले दोषियों की संख्या और बढ़ गई है।

2016 में दर्ज हुआ था मामला

मगध और आम्रपाली कोल परियोजनाओं से जुड़े टेरर फंडिंग मामले की शुरुआत टंडवा थाने में दर्ज कांड संख्या 2/2016 से हुई थी। बाद में 13 फरवरी 2018 को एनआईए ने मामले की जांच अपने हाथ में ले ली।

जांच पूरी करने के बाद एनआईए ने 16 आरोपितों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था। इसके बाद रांची स्थित एनआईए की विशेष अदालत में मामले की सुनवाई हुई और दोषियों को सजा सुनाई गई।

कोयला ढुलाई के ठेकों के जरिए लेवी देने का आरोप

एनआईए की जांच में सामने आया था कि मगध और आम्रपाली कोल परियोजनाओं में कोयला ढुलाई के नाम पर उग्रवादी संगठन तृतीय प्रस्तुति समिति (टीपीसी) को कथित तौर पर धन मुहैया कराया जा रहा था।

जांच एजेंसी के अनुसार, टीपीसी को लेवी देने के उद्देश्य से दोनों परियोजनाओं में कोयला ढुलाई के ठेके ऊंची दरों पर लिए गए थे। आरोप था कि इस व्यवस्था के जरिए जुटाई गई रकम का इस्तेमाल उग्रवादी संगठन को आर्थिक सहायता पहुंचाने में किया जाता था।

एनआईए ने अपनी जांच में सीसीएल, पुलिस, उग्रवादी संगठन और शांति समिति से जुड़े कुछ लोगों के बीच कथित समन्वय की बात भी कही थी। इसी कथित आर्थिक नेटवर्क को लेकर मामले की जांच और सुनवाई की गई।

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