भोजपुर के भरत तिवारी एनकाउंटर में बड़ी कार्रवाई, फर्जी मुठभेड़ का शक गहराया, पहली गोली चलाने वाला एसटीएफ जवान अक्षय कुमार गिरफ्तार

Share

पटना, 31 जुलाई — बिहार के चर्चित भरत तिवारी मुठभेड़ मामले में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। विशेष जांच टीम (SIT) ने बिहार स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) के जवान अक्षय कुमार को गिरफ्तार कर लिया है। यह कार्रवाई आरा पुलिस और एसटीएफ की संयुक्त टीम ने की। आरा के पुलिस अधीक्षक (एसपी) राज ने गिरफ्तारी की पुष्टि की है।

वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई

जांच एजेंसियों के अनुसार, यह अब तक की सबसे महत्वपूर्ण कार्रवाई मानी जा रही है। गिरफ्तारी वैज्ञानिक साक्ष्यों, वीडियो फुटेज और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के आधार पर की गई है। जांच टीम इन सभी तथ्यों का मिलान कर घटना की पूरी कड़ी जोड़ने में जुटी है।

आत्मसमर्पण के बाद गोली चलाने का आरोप

जांच से जुड़े वीडियो साक्ष्यों के आधार पर दावा किया गया है कि घटना के दिन भरत तिवारी ने पुलिस और एसटीएफ टीम के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था। आरोप है कि इसके बावजूद सबसे पहली गोली एसटीएफ जवान अक्षय कुमार ने चलाई। पहली गोली लगने के बाद भरत तिवारी गिर पड़े, जिसके बाद उन्हें तीन और गोलियां मारी गईं, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

फर्जी मुठभेड़ की आशंका

यदि जांच में ये आरोप सही साबित होते हैं, तो मामला कथित फर्जी मुठभेड़ और हत्या जैसे गंभीर अपराधों का रूप ले सकता है। फिलहाल जांच एजेंसियां सभी उपलब्ध साक्ष्यों और संबंधित अधिकारियों के बयानों के आधार पर विस्तृत जांच कर रही हैं।

परिजनों की मांग के बाद तेज हुई जांच

मामले में कार्रवाई उस समय तेज हुई, जब 24 जुलाई को मृतक के परिजनों ने पटना में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात कर निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की थी। मुख्यमंत्री ने परिजनों को निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया था।

परिजनों ने बताया पहला कदम

अक्षय कुमार की गिरफ्तारी के बाद परिजनों ने इसे न्याय की दिशा में पहला महत्वपूर्ण कदम बताया है। हालांकि उनका कहना है कि केवल एक जवान की गिरफ्तारी पर्याप्त नहीं है और मुठभेड़ में शामिल अन्य अधिकारियों और कर्मियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।

प्रशासनिक स्तर पर भी हुई कार्रवाई

उल्लेखनीय है कि इस मामले में पहले ही तत्कालीन एसडीएम संजीत कुमार को पद से हटाया जा चुका है। इसके अलावा तत्कालीन एसडीपीओ राजेश कुमार शर्मा को भी लाइन हाजिर किया गया है। इन कार्रवाइयों के बाद से ही यह संकेत मिल रहे थे कि जांच एजेंसियां आगे और भी सख्त कदम उठा सकती हैं।

यह मामला अब बिहार में कानून-व्यवस्था और पुलिस कार्रवाई की पारदर्शिता को लेकर एक बड़ी बहस का विषय बन गया है।

Share this article

Facebook
Twitter X
WhatsApp
Telegram
 
October 2026
M T W T F S S
 1234
567891011
12131415161718
19202122232425
262728293031