भारतीय छात्रों को नहीं भा रहा अमेरिका; छात्रों की नई पसंद बना दुबई!

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उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाने का सपना देखने वाले भारतीय छात्रों की पसंद में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। पहले जहां हर युवा की पहली पसंद अमेरिका, ब्रिटेन या कनाडा हुआ करती थी, वहीं अब पश्चिमी एशिया के देश, खास तौर पर दुबई, करियर के नए हब के रूप में उभरा है। छात्रों का मानना है कि यह मंजिल न केवल घर के करीब है, बल्कि सुरक्षित और किफायती भी है।

केरल के त्रिशूर के संजय कृष्णा इसका एक उदाहरण हैं। वे पहले ब्रिटेन जाने की तैयारी में थे, लेकिन वहां की भारी-भरकम फीस और रहने के खर्च ने उन्हें दुबई की राह दिखा दी।

खर्च में भारी बचत और नामी संस्थानों के ग्लोबल कैम्पस
ब्रिटेन में जिस एमबीए कोर्स की फीस 18 लाख रुपये थी, वही दुबई की मिडलसेक्स यूनिवर्सिटी में मात्र 14 लाख रुपये में उपलब्ध है। सिर्फ फीस ही नहीं, रहने-खाने के खर्च में भी जमीन-आसमान का अंतर है। जहां ब्रिटेन में रहने का खर्च प्रति माह एक लाख रुपये से अधिक आता है, वहीं दुबई में बेहतर सुविधाओं के साथ छात्र 70,000 रुपये में अपनी जरूरतें पूरी कर रहे हैं।

विशेषज्ञों की मानें तो 2023 के बाद से दुबई में दाखिला लेने वाले भारतीय छात्रों की संख्या में 40 गुना की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके पीछे मुख्य कारण पश्चिमी देशों में वीज़ा के सख्त नियम, वर्क परमिट को लेकर अनिश्चितता और बढ़ती महंगाई है। दुबई में प्लस पॉइंट यह है कि यहां दुनिया के कई नामी विश्वविद्यालयों के ग्लोबल कैम्पस मौजूद हैं, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर की डिग्री प्रदान करते हैं। साथ ही, घर के करीब होने के कारण माता-पिता भी बच्चों की सुरक्षा को लेकर अधिक आश्वस्त रहते हैं।

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