बैतूल में राष्ट्रपति मुर्मु का बड़ा संदेश—जड़ों से जुड़ा विकास ही असली प्रगति

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बैतूल: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि विकास और संस्कृति के बीच संतुलन ही एक सशक्त और समृद्ध समाज की नींव है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि सार्थक विकास वही है, जो हमारी जड़ों और जीवन मूल्यों से जुड़ा हो तथा उन्हें और मजबूत बनाए।

राष्ट्रपति मुर्मु गुरुवार को मध्य प्रदेश के बैतूल में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित ‘आध्यात्मिक जागृति से जनजातीय समाज का सशक्तिकरण’ महासम्मेलन को संबोधित कर रही थीं।

आध्यात्मिकता की अहम भूमिका

उन्होंने कहा कि उपभोगवादी संस्कृति के इस दौर में समाज के हर वर्ग के लिए आध्यात्मिक शुचिता बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। इसके माध्यम से दीर्घकालिक रूप से समानता आधारित आचरण और प्राकृतिक संसाधनों के प्रति संवेदनशील जीवनशैली विकसित की जा सकती है।

आत्मविश्वास और जागरूकता से सशक्तीकरण

राष्ट्रपति ने कहा कि समाज का वास्तविक सशक्तीकरण तब होता है, जब व्यक्ति आत्मविश्वास, आत्मसम्मान और जागरूकता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करता है। उन्होंने कहा कि अध्यात्म और सेवा के संगम से ही समाज में स्थायी परिवर्तन संभव है।

कार्यक्रम की झलकियां

कार्यक्रम स्थल पहुंचने पर राष्ट्रपति ने पौधरोपण किया और विभिन्न विभागों द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन किया। लाल बहादुर शास्त्री स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान से हुई, जिसके बाद दीप प्रज्ज्वलन कर महासम्मेलन का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दी गईं।

इस महासम्मेलन की अध्यक्षता मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने की। मंच पर केंद्रीय राज्यमंत्री दुर्गादास उईके, राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल सहित कई विशिष्ट अतिथि मौजूद रहे।

ओंकारेश्वर के लिए रवाना

कार्यक्रम के बाद राष्ट्रपति कड़ी सुरक्षा के बीच खंडवा जिले के ओंकारेश्वर के लिए रवाना हो गईं, जहां वे शाम को ओंकारेश्वर-ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन और संध्या आरती में शामिल होंगी।

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