बिहार विधानसभा में गरमाया धर्मांतरण का मुद्दा: सत्ता पक्ष ने की कड़े कानून की मांग, सरकार ने फिलहाल प्रस्ताव से किया इनकार

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पटना। बिहार विधानमंडल के बजट सत्र के अंतिम दिन विधानसभा में धर्म परिवर्तन को लेकर कड़ा कानून बनाने की मांग उठी। ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के माध्यम से सत्तापक्ष के कई विधायकों ने इस मुद्दे को सदन में उठाते हुए राज्य में धर्मांतरण पर नियंत्रण के लिए सख्त कानून लागू करने की मांग की।

इस मुद्दे को उठाने वालों में मिथिलेश तिवारी, वीरेंद्र कुमार जनक सिंह, संजय कुमार सिंह, जीवेश कुमार मिश्रा सहित कुल 18 विधायक शामिल थे। सदस्यों ने कहा कि उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड और गुजरात जैसे राज्यों में धर्म परिवर्तन विरोधी कानून लागू हैं, जहां धोखाधड़ी, प्रलोभन या बाल विवाह के माध्यम से धर्म परिवर्तन कराने पर कठोर सजा का प्रावधान है।

विधायकों ने दावा किया कि बिहार में ईसाई और मुस्लिम आबादी में असामान्य वृद्धि दर्ज की गई है तथा राज्य में बड़ी संख्या में चर्च स्थापित हुए हैं। सीमावर्ती जिलों में जनसंख्या संरचना में बदलाव की बात कहते हुए उन्होंने धर्म परिवर्तन की घटनाओं पर चिंता जताई और कहाै कि बिहार में 5000 से अधिक चर्च की स्थापना हो चुकी है। ईसाइयों का राष्ट्रीय स्तर पर ग्रोथ रेट 15.5 प्रतिशत है, जबकि बिहार में 143.23 प्रतिशत है।

भाजपा विधायक मिथिलेश तिवारी ने कहा कि उत्तर प्रदेश की तर्ज पर बिहार में भी सख्त कानून बनाया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि बक्सर जिले में बड़ी संख्या में (लगभग 1000) दलित परिवारों ने धर्म परिवर्तन किया है तथा सीमांचल क्षेत्र के कई जिलों (कटिहार, पूर्णिया, किशनगंज, अररिया) का डेमोग्राफी चेंज हो गया है। इसलिए इस कानून की जरूरत है, सरकार को इस पर विचार करना चाहिए।

जाले से भाजपा विधायक जीवेश कुमार मिश्रा ने धर्म परिवर्तन के बाद आरक्षण लाभ मिलने के मुद्दे को उठाते हुए इस पर स्पष्ट कानूनी व्यवस्था की आवश्यकता बताई। वहीं विधायक संजय सिंह ने धर्मांतरण को गंभीर राष्ट्रीय विषय बताते हुए कड़े कानून की मांग दोहराई।

हालांकि, सरकार की ओर से जवाब देते हुए पर्यटन, कला एवं संस्कृति मंत्री अरुण शंकर प्रसाद ने स्पष्ट किया कि फिलहाल राज्य सरकार के पास धर्म परिवर्तन को लेकर कोई नया कानून लाने का प्रस्ताव नहीं है। मंत्री के जवाब के बाद विपक्षी सदस्यों ने हंगामा किया, जिस पर विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने कहा कि विषय को नियमन दे दिया गया है और सरकार आवश्यकता अनुसार इसकी समीक्षा करेगी।

अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि इस मुद्दे पर आगे चर्चा नहीं कराई जाएगी, जिसके बाद सदन की कार्यवाही आगे बढ़ाई गई।

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