बिहार में औद्योगिक विकास को रफ्तार: गया में 6000 करोड़ के स्टील प्लांट पर समझौता, 1.5 MTPA तक होगी उत्पादन क्षमता

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पटना, 31 जुलाई — बिहार के गयाजी जिले में एक बड़े एकीकृत इस्पात उद्योग की स्थापना का मार्ग प्रशस्त हो गया है। इस संबंध में बिहार सरकार के उद्योग विभाग और महाशक्ति ग्रुप के बीच गुरुवार को एक महत्वपूर्ण समझौता (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की मौजूदगी में लोक सेवक आवास स्थित ‘संकल्प’ सभागार में आयोजित कार्यक्रम के दौरान हुआ।

6 हजार करोड़ की बड़ी परियोजना

इस परियोजना की कुल प्रस्तावित लागत लगभग 6 हजार करोड़ रुपये है। गयाजी में स्थापित होने वाले इस इस्पात प्लांट की उत्पादन क्षमता 1.0 से 1.5 मिलियन टन प्रति वर्ष (MTPA) होगी, जो राज्य के औद्योगिक विकास में अहम भूमिका निभाएगा।

रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि इस परियोजना से स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे। इसके साथ ही सहायक और लघु उद्योगों को भी बढ़ावा मिलेगा, जिससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

निवेश को बढ़ावा देने की दिशा में कदम

सरकार ने भरोसा जताया कि बिहार इंडस्ट्रियल एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (BIADA), उद्योग विभाग और निवेशकों के समन्वित प्रयास से परियोजना तय समय सीमा में पूरी की जाएगी। राज्य सरकार निवेशकों को जमीन सहित कई सुविधाएं उपलब्ध करा रही है।

30 दिनों में निवेश प्रस्ताव की मंजूरी

हाल ही में राज्य सरकार ने एक नया प्रावधान लागू किया है, जिसके तहत निवेश प्रस्तावों को 30 दिनों के भीतर स्वीकृति दी जाएगी। इससे निवेशकों को तेजी से परियोजनाएं शुरू करने में मदद मिलेगी।

5 लाख करोड़ निवेश का लक्ष्य

सरकार ने इस वर्ष नवंबर तक 5 लाख करोड़ रुपये के निवेश का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसी क्रम में विभिन्न क्षेत्रों में बड़े उद्योग समूहों के साथ लगातार समझौते किए जा रहे हैं।

कार्यक्रम में कई वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद

इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, मुख्यमंत्री के सचिव लोकेश कुमार सिंह और संजय कुमार सिंह, उद्योग विभाग के सचिव कुंदन कुमार, निदेशक मुकुल कुमार गुप्ता सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। महाशक्ति ग्रुप की ओर से अनमोल लोढ़ा, विष्णु नाथ और अन्य पदाधिकारी भी कार्यक्रम में शामिल हुए।

यह समझौता बिहार में औद्योगिक निवेश को गति देने और रोजगार सृजन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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