पटना: मनरेगा की जगह अब विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन ग्रामीण योजना (VB-G RAM G) 1 जुलाई 2026 से लागू होने जा रही है। इस नई योजना के तहत ग्रामीण परिवारों को 125 दिनों के रोजगार की गारंटी दी जाएगी। बिहार सरकार ने इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में बिहार राज्य ग्रामीण रोजगार गारंटी परिषद का गठन किया है।
मुख्यमंत्री स्तर पर होगी निगरानी
परिषद में मुख्यमंत्री के साथ ग्रामीण विकास, वित्त, पंचायती राज, शिक्षा, पर्यावरण-वन, जल संसाधन, राजस्व, ग्रामीण कार्य, कृषि, एससी-एसटी कल्याण, श्रम संसाधन और लघु जल संसाधन विभागों के मंत्री शामिल होंगे। मुख्य सचिव, विकास आयुक्त, ग्रामीण विकास के प्रधान सचिव और योजना निदेशक पदेन सदस्य रहेंगे। इसके अलावा पंचायती राज संस्थाओं, श्रमिक संगठनों और कमजोर वर्गों से अधिकतम 15 गैर-सरकारी सदस्य नामित किए जाएंगे, जिनमें एक तिहाई महिलाएं होंगी।
राज्य, जिला और प्रखंड स्तर पर व्यवस्था
योजना के संचालन के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में 17 सदस्यीय राज्य स्तरीय संचालन समिति बनाई गई है। जिलों में डीएम को जिला कार्यक्रम समन्वयक और प्रखंड स्तर पर बीडीओ को कार्यक्रम पदाधिकारी की जिम्मेदारी दी गई है। इससे योजना के क्रियान्वयन और निगरानी को मजबूत बनाया जाएगा।
देशभर में एक समान मजदूरी की मांग
दिल्ली में आयोजित एक सम्मेलन में बिहार के ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने देशभर में समान मजदूरी लागू करने की मांग की। उन्होंने कहा कि सभी राज्यों के मजदूरों को बराबर लाभ मिलना चाहिए। नई योजना में मजदूरी भुगतान में देरी होने पर ब्याज देने का प्रावधान किया गया है। मजदूरी का भुगतान साप्ताहिक या अधिकतम 15 दिनों के भीतर किया जाएगा।
125 दिन रोजगार, बढ़ेगा राज्य का खर्च
नई योजना में मनरेगा के 100 दिनों के बजाय 125 दिनों का रोजगार सुनिश्चित किया गया है। हालांकि इसके साथ ही राज्य सरकार पर वित्तीय बोझ भी बढ़ेगा, क्योंकि अब कुल खर्च का 40 प्रतिशत राज्य को वहन करना होगा, जबकि पहले यह हिस्सा 10 प्रतिशत था। सरकार का मानना है कि इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
कृषि और ‘विकसित भारत 2047’ पर फोकस
इस योजना के तहत प्रत्येक ग्राम पंचायत ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य के अनुरूप अपनी कार्ययोजना तैयार करेगी। खासतौर पर कृषि क्षेत्र पर जोर दिया जाएगा, ताकि खेती के मौसम में मजदूरों की कमी न हो और उत्पादन बढ़ाया जा सके।
मंजूरी की शक्तियां बढ़ाई गईं
योजना के तेजी से क्रियान्वयन के लिए विभिन्न स्तरों पर अधिकारियों को मंजूरी देने की शक्तियां दी गई हैं। पंचायत स्तर पर 10 लाख, कार्यक्रम अधिकारी को 15 लाख, डीडीसी को 1 करोड़ और डीएम को 30 करोड़ रुपये तक की योजनाओं को मंजूरी देने का अधिकार दिया गया है। इंजीनियरिंग अधिकारियों को भी इसी सीमा के तहत अधिकार प्रदान किए गए हैं।
पात्रता और भुगतान व्यवस्था
इस योजना का लाभ उन रजिस्टर्ड ग्रामीण परिवारों को मिलेगा, जिनके वयस्क सदस्य का नाम रोजगार गारंटी कार्ड में दर्ज है। ऐसे सदस्य अकुशल शारीरिक श्रम के लिए आवेदन कर सकते हैं। सरकार ने समयबद्ध मजदूरी भुगतान सुनिश्चित करने का भरोसा दिया है।
बिहार सरकार को उम्मीद है कि VB-G RAM G योजना ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा करेगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति देगी।






