बाढ़ से भागलपुर बेहाल, 8.5 लाख से ज्यादा लोग पानी में घिरे; घर-बार छोड़ ऊंचे स्थानों पर शरण, दो वक्त की रोटी के लिए भी जद्दोजहद

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भागलपुर, 14 सितंबर । गंगा नदी के रौद्र रूप के कारण भागलपुर जिले में बाढ़ की स्थिति बेहद भयावह बनी हुई है। जिले के 111 गांव और 437 वार्ड बाढ़ की चपेट में हैं। इससे 2,00,102 परिवारों के 8,56,379 लोग प्रभावित हुए हैं। गंगा पार के इलाकों में स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक है, जहां लोगों के सामने सुरक्षित ठिकाने के साथ-साथ दो वक्त की रोटी जुटाने की चुनौती भी बनी हुई है।

गंगा पार के इलाकों में हालात गंभीर

गंगा पार के कई इलाकों में अब भी पानी गर्दन तक पहुंचा हुआ है। पूर्व मंत्री बुलो मंडल के आवास के आसपास का इलाका भी जलमग्न है। पानी कब तक उतरेगा, इसे लेकर लोगों में अनिश्चितता बनी हुई है।

बाढ़ की गंभीर स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन और एसडीआरएफ की टीमें राहत एवं बचाव कार्यों में जुटी हैं।

24 हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला गया

प्रशासन के अनुसार, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से अब तक 24,812 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है। आवागमन और राहत-बचाव कार्यों के लिए 122 नावों का परिचालन किया जा रहा है।

स्वास्थ्य सेवाओं के लिए 80 चिकित्सा केंद्र सक्रिय किए गए हैं। वहीं, बाढ़ प्रभावित पशुओं की संख्या भी बढ़कर 79,390 हो गई है, जिससे पशुओं की सुरक्षा और चारे की व्यवस्था प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है।

317 सामुदायिक रसोई से मिल रहा भोजन

बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए प्रशासन की ओर से 317 सामुदायिक रसोई संचालित की जा रही हैं। इन रसोइयों के माध्यम से प्रभावित परिवारों तक भोजन पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

हालांकि, राहत और सरकारी व्यवस्थाओं के बावजूद कई बेघर परिवारों की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं। सैकड़ों परिवार ऊंचे स्थानों पर शरण लेकर अस्थायी और असुरक्षित परिस्थितियों में रहने को मजबूर हैं।

बच्चों की सुरक्षा बनी सबसे बड़ी चिंता

चारों तरफ पानी से घिरे परिवारों के लिए बच्चों की सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता बन गई है। बाढ़ पीड़ितों का कहना है कि अनहोनी के डर से महिलाएं दिन-रात बच्चों पर नजर रख रही हैं, ताकि खेलते या चलते समय वे पानी की ओर न चले जाएं।

बाढ़ ने परिवारों की रोजमर्रा की जिम्मेदारियों को भी बदल दिया है। जहां महिलाएं बच्चों की निगरानी में जुटी हैं, वहीं कई परिवारों में पुरुष भोजन जुटाने और खाना पकाने की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

भीगी लकड़ियों से चूल्हा जलाना बना चुनौती

सामुदायिक रसोई के बावजूद कई परिवार अपने स्तर पर भी खाना पकाने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन चारों तरफ पानी भरा होने के कारण सूखी लकड़ी मिलना मुश्किल हो गया है।

बाढ़ पीड़ितों ने बताया कि जो भी जलावन मिल रही है, वह पूरी तरह भीगी हुई है। ऐसी लकड़ियों को जलाने के लिए घंटों मशक्कत करनी पड़ती है। कई लोग हाथ से पंखा झलकर आग सुलगाते हैं, तब कहीं जाकर परिवार के लिए दो वक्त की रोटी तैयार हो पाती है।

पानी उतरने की धीमी रफ्तार से बढ़ी चिंता

बाढ़ का पानी धीमी गति से उतरने के कारण ग्रामीणों की चिंता लगातार बढ़ रही है। लंबे समय तक जलजमाव से घर-बार, आजीविका और सुरक्षा सभी प्रभावित हैं।

प्रभावित परिवारों के सामने फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती सुरक्षित स्थान पर रहने के साथ भोजन, बच्चों की सुरक्षा और रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करना है। राहत कार्यों के बीच लोगों को अब बाढ़ का पानी जल्द उतरने और सामान्य जनजीवन बहाल होने का इंतजार है।

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