—, 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री से हुआ है निर्माण
नई दिल्ली। भारतीय नौसेना की समुद्री क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए स्वदेशी बहुउद्देशीय पोत ‘समर्थक’ को शुक्रवार को नौसेना के बेड़े में शामिल किया गया। कर्नाटक के कारवार स्थित कदंब नौसैनिक अड्डे पर उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने इस पोत को राष्ट्र को समर्पित किया। इसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण अभियानों और नौसेना की भविष्य की परिचालन जरूरतों के लिए तैयार किया गया है।
‘मेक इन इंडिया’ के तहत हुआ निर्माण
बहुउद्देशीय पोत ‘समर्थक’ का निर्माण चेन्नई के पास लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) के कट्टुपल्ली शिपयार्ड में भारत सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत किया गया है। पोत में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल हुआ है।
यह भारतीय नौसेना के लिए निर्धारित चार बहुउद्देशीय पोतों में पहला है। नौसेना को यह जहाज 27 अगस्त को सौंपा गया था। बेड़े में शामिल किए जाने से पहले यह सभी समुद्री परीक्षणों से गुजर चुका है।
निगरानी से लेकर आपदा राहत तक निभाएगा कई भूमिकाएं
‘समर्थक’ को मुख्य रूप से समुद्री निगरानी और गश्त के लिए डिजाइन किया गया है। हालांकि, इसकी बहुउद्देशीय क्षमता के कारण इसका इस्तेमाल कई तरह के अभियानों में किया जा सकेगा। इनमें कम तीव्रता वाले समुद्री अभियान, लक्ष्य तैनाती और परीक्षण संबंधी गतिविधियां शामिल हैं।

यह पोत मानवरहित और स्वायत्त प्रणालियों के लिए ‘मदरशिप’ के रूप में भी काम कर सकता है। इसके अलावा मानवीय सहायता, आपदा राहत, बचाव कार्यों और जरूरत पड़ने पर सीमित अस्पताल जहाज के रूप में इस्तेमाल की क्षमता भी इसमें शामिल है।
स्वदेशी सेंसर और इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों से लैस
पोत में एकीकृत युद्ध प्रणाली के साथ स्वदेशी सेंसर, हथियार और इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियां लगाई गई हैं। इसे चुनौतीपूर्ण समुद्री परिस्थितियों में काम करने की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
नौसेना की भविष्य की परिचालन आवश्यकताओं के लिहाज से ‘समर्थक’ को एक बहुमुखी उपयोगिता मंच के रूप में देखा जा रहा है। इसकी विभिन्न भूमिकाएं समुद्री अभियानों के दौरान नौसेना को अतिरिक्त परिचालन विकल्प उपलब्ध करा सकती हैं।
पोत पर भारतीय हाथी का प्रतीक, आदर्श वाक्य ‘विजयार्थम् एकनिष्ठता’
‘समर्थक’ के शिखर पर लहरों से निकलते हुए भारतीय हाथी का प्रतीक दर्शाया गया है। इसे शक्ति, बुद्धिमत्ता और चपलता का प्रतीक माना गया है।
इस पोत का आदर्श वाक्य ‘विजयार्थम् एकनिष्ठता’ है, जिसका अर्थ है—‘विजय ही हमारा एकमात्र लक्ष्य है।’
स्वदेशी पोत को नौसेना में शामिल किया जाना रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में भारत के प्रयासों को आगे बढ़ाने वाला कदम है। इससे नौसेना की बहुउद्देशीय समुद्री अभियानों से जुड़ी क्षमताओं को मजबूती मिलने की उम्मीद है।






