—किसान ब्रिगेड ने उपायुक्त से की शिकायत, दवाओं की गुणवत्ता और बिक्री की जांच का आग्रह
पलामू, 07 अक्टूबर। हुसैनाबाद अनुमंडल मैदान में पिछले छह दिनों से चल रहे काली कंबली वाले बाबा के कथित उपचार शिविर को लेकर सवाल उठने लगे हैं। शिविर में गंभीर बीमारियों के उपचार के दावों और दवाओं की बिक्री को लेकर किसान ब्रिगेड ने आपत्ति जताई है। संगठन के प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को पलामू उपायुक्त दिलीप प्रताप सिंह शेखावत से मुलाकात कर पूरे मामले की जांच कराने की मांग की।
उपायुक्त को सौंपा ज्ञापन, जांच की मांग
किसान ब्रिगेड के प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त को सौंपे ज्ञापन में शिविर में कथित तौर पर किए जा रहे उपचार और उपलब्ध कराई जा रही दवाओं की स्वीकृति, गुणवत्ता, परीक्षण और बिक्री की अनुमति की जांच कराने का आग्रह किया।
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि यदि जांच में किसी तरह की अनियमितता, धोखाधड़ी या अन्य अपराध की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ विधिसम्मत कार्रवाई की जानी चाहिए।
लकवा, पोलियो और मधुमेह ठीक करने के दावे पर सवाल
किसान ब्रिगेड ने आरोप लगाया कि शिविर में लकवा, पोलियो, मूक-बधिरता और मधुमेह जैसी गंभीर बीमारियों को ठीक करने का दावा कर ग्रामीणों को आकर्षित किया जा रहा है।
संगठन ने इन दावों की वैज्ञानिक और चिकित्सकीय जांच कराने की मांग की है। प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि गंभीर बीमारियों के उपचार को लेकर किए जा रहे किसी भी दावे की जांच संबंधित स्वास्थ्य विभाग के विशेषज्ञों से कराई जानी चाहिए।
निःशुल्क मेडिकल शिविर के नाम पर दवा बिक्री का आरोप
किसान ब्रिगेड के संरक्षक कर्नल (सेवानिवृत्त) संजय सिंह ने कहा कि निःशुल्क मेडिकल शिविर के नाम पर लोगों की बड़ी भीड़ जुटाई गई है। उन्होंने दावा किया कि शिविर में दवाओं की बिक्री किए जाने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं।
उन्होंने उपचार और झाड़-फूंक के माध्यम से गंभीर बीमारियों के ठीक होने के दावों की भी वैज्ञानिक जांच कराने की मांग की। उनका कहना है कि प्रशासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि शिविर में किस प्रकार का उपचार किया जा रहा है और वहां उपलब्ध कराई जा रही दवाएं नियमानुसार हैं या नहीं।
दवाओं की कीमत और अनुमति की हो जांच
प्रतिनिधिमंडल ने शिविर में इस्तेमाल और उपलब्ध कराई जा रही दवाओं की गुणवत्ता, परीक्षण, बिक्री की अनुमति और निर्धारित मूल्य की जांच कराने का आग्रह किया।
किसान ब्रिगेड ने प्रशासन से यह भी पता लगाने की मांग की है कि शिविर में दवाओं की बिक्री की जा रही है तो उसके लिए आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक अनुमति ली गई है या नहीं।
जीएसटी और आयकर नियमों की जांच की मांग
कर्नल संजय सिंह ने शिविर के लिए मैदान के निःशुल्क आवंटन की शर्तों के अनुपालन की भी जांच कराने की मांग की। उन्होंने दवा बिक्री से जुड़े जीएसटी और आयकर नियमों के पालन की जांच कराने का आग्रह प्रशासन से किया।
प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि यदि मैदान किसी विशेष शर्त पर उपलब्ध कराया गया है तो यह भी देखा जाना चाहिए कि शिविर संचालकों की ओर से उन सभी शर्तों का पालन किया जा रहा है या नहीं।
मरीजों के लिए सुविधाओं पर भी उठाए सवाल
किसान ब्रिगेड ने शिविर में आने वाले मरीजों और उनके परिजनों के लिए पर्याप्त ठहरने, शौचालय, पेयजल और सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने का भी आरोप लगाया।
संगठन ने प्रशासन से मांग की कि बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी को देखते हुए शिविर स्थल पर बुनियादी सुविधाओं और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जाए, ताकि मरीजों और उनके परिजनों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
पॉकेटमारी और चोरी की शिकायतों का भी हवाला
प्रतिनिधिमंडल ने शिविर में पॉकेटमारी और चोरी की शिकायतों का भी हवाला दिया। किसान ब्रिगेड ने प्रशासन से शिविर स्थल पर पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।
संगठन का कहना है कि बड़ी संख्या में ग्रामीणों और मरीजों की भीड़ को देखते हुए पुलिस की पर्याप्त तैनाती और निगरानी जरूरी है।
स्वास्थ्य विभाग की टीम से जांच कराने की मांग
किसान ब्रिगेड ने पूरे मामले की जांच के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीम शिविर स्थल पर भेजने का आग्रह किया है। संगठन ने कहा कि दवाओं, उपचार के दावों और शिविर में उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं की जांच विशेषज्ञ टीम से कराई जानी चाहिए।
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि जांच में यदि किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो प्रशासन को संबंधित लोगों के खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए।
प्रतिनिधिमंडल में ये लोग रहे शामिल
उपायुक्त से मिलने वाले प्रतिनिधिमंडल में भोला पासवान, सुधीर सिंह, मनोहर सिंह और सुभाष कुमार शामिल थे। प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त से पूरे मामले में निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की।






