पटना में ‘डिजिटल अरेस्ट’ से 82.53 लाख की ठगी, रिटायर्ड प्रोफेसर बने शिकार, CBI अफसर बनकर 8 दिनों तक रखा दबाव

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पटना — राजधानी पटना में साइबर अपराधियों ने एक चौंकाने वाली ठगी को अंजाम देते हुए ‘डिजिटल अरेस्ट’ का भय दिखाकर एक रिटायर्ड प्रोफेसर से 82.53 लाख रुपये ठग लिए। कदमकुआं थाना क्षेत्र के तिब्बी कॉलेज के सेवानिवृत्त प्रोफेसर मोहम्मद ग्यासउद्दीन को ठगों ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताकर करीब 8 दिनों तक मानसिक दबाव में रखा और कई किश्तों में रकम ट्रांसफर करवा ली।

फर्जी केस में फंसाने की धमकी
घटना की शुरुआत 27 मार्च 2026 को एक कॉल से हुई, जिसमें कॉलर ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताया। उसने दावा किया कि प्रोफेसर के मोबाइल नंबर का इस्तेमाल देश विरोधी गतिविधियों और मनी लॉन्ड्रिंग में हुआ है। ठगों ने गिरफ्तारी और जेल भेजने की धमकी देकर उन्हें डराया।

‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखकर वसूली
साइबर अपराधियों ने पीड़ित को 8 अप्रैल तक तथाकथित ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखा। इस दौरान व्हाट्सएप कॉल और मैसेज के जरिए लगातार संपर्क बनाए रखा गया और उन्हें किसी से बात न करने की सख्त हिदायत दी गई। डर के माहौल में प्रोफेसर से RTGS और UPI के माध्यम से अलग-अलग किस्तों में कुल 82.53 लाख रुपये ट्रांसफर करवा लिए गए।

ठगी के बाद भी जारी रही धमकी
रकम ट्रांसफर होने के बाद भी साइबर अपराधी जून के अंतिम सप्ताह तक व्हाट्सएप के जरिए उन्हें धमकाते रहे। बाद में एक परिचित के घर आने पर पीड़ित ने पूरी घटना बताई, तब उन्हें ठगी का एहसास हुआ और साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई।

पुलिस जांच में जुटी
डीएसपी (साइबर) नीतीश चंद्र धारिया ने बताया कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है। जिन बैंक खातों में पैसे भेजे गए हैं, उनकी जानकारी जुटाई जा रही है और लेन-देन के आधार पर अपराधियों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।

राजधानी में बढ़ते साइबर अपराध
पटना में हाल के दिनों में साइबर ठगी के कई मामले सामने आए हैं। कंकड़बाग में एक व्यक्ति से 1.25 लाख, खेमनीचक में 2.70 लाख, दीदारगंज में 95 हजार और फुलवारीशरीफ में 1.74 लाख रुपये की ठगी की घटनाएं सामने आई हैं।

क्या है ‘डिजिटल अरेस्ट’?
‘डिजिटल अरेस्ट’ साइबर ठगी का एक नया तरीका है, जिसमें अपराधी खुद को आयकर विभाग, सीबीआई या अन्य केंद्रीय एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को झूठे मामलों में फंसाने की धमकी देते हैं। फिर पीड़ित को मानसिक दबाव में रखकर उनसे संपर्क सीमित कर देते हैं और पैसे ट्रांसफर कराने के लिए मजबूर करते हैं।

सावधानी ही बचाव
ऐसे मामलों में किसी भी अज्ञात कॉल या मैसेज पर भरोसा न करें। किसी भी एजेंसी द्वारा फोन या व्हाट्सएप पर ‘गिरफ्तारी’ की बात कहना संदिग्ध होता है। किसी भी दबाव में आकर पैसे ट्रांसफर न करें और तुरंत पुलिस या साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करें।

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