नेतरहाट आवासीय विद्यालय के लिए नई नियमावली 2026 लागू; JAC लेगा प्रवेश परीक्षा, JPSC करेगा नियुक्तियां, सत्र 2026-27 से शुरू होगा छात्राओं का दाखिला
लातेहार : झारखंड की शिक्षा व्यवस्था में एक ऐतिहासिक बदलाव करते हुए राज्य सरकार ने नेतरहाट आवासीय विद्यालय के लिए नई “विद्यालय प्रबंधन और संचालन नियमावली, 2026” लागू कर दी है। इस फैसले के तहत अब पहली बार छात्राओं को भी प्रवेश मिलेगा। नई व्यवस्था में बेटियों के लिए कुल सीटों में 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित किया गया है, जिससे राज्य में लैंगिक समानता को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
इस ऐतिहासिक निर्णय की जानकारी सबसे पहले प्रभात खबर ने प्रकाशित की थी, जिस पर अब आधिकारिक मुहर लग चुकी है।
बेटियां भी रचेंगी इतिहास
देश के प्रतिष्ठित आवासीय विद्यालयों में शुमार नेतरहाट विद्यालय में अब छात्राएं भी शिक्षा प्राप्त कर सकेंगी। दशकों से केवल छात्रों के लिए संचालित इस संस्थान में बेटियों की एंट्री को सामाजिक और शैक्षणिक दृष्टि से एक क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है। यह निर्णय राज्य में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक लड़कियों की पहुंच सुनिश्चित करेगा।
सीटों में भारी बढ़ोतरी का लक्ष्य
सरकार ने विद्यालय की क्षमता विस्तार के लिए स्पष्ट समयसीमा तय की है।
- अगले तीन वर्षों में सीटों को दोगुना किया जाएगा।
- पांच वर्षों में सीटों को तिगुना करने का लक्ष्य रखा गया है।
गौरतलब है कि विद्यालय में अंतिम बार सीटों की वृद्धि वर्ष 1982 में की गई थी।
प्रवेश परीक्षा की जिम्मेदारी JAC को
प्रवेश प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए परीक्षा आयोजित करने की जिम्मेदारी झारखंड एकेडमिक काउंसिल (JAC) को सौंपी गई है। सत्र 2026-27 से प्रवेश परीक्षा दो चरणों—प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा—में आयोजित की जाएगी, जिसमें वस्तुनिष्ठ प्रश्न पूछे जाएंगे।
वहीं, शिक्षकों और कर्मचारियों की स्थायी नियुक्ति झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) के माध्यम से की जाएगी, ताकि योग्य शिक्षकों की कमी को दूर किया जा सके।
चार स्तरीय सुदृढ़ प्रबंधन ढांचा
विद्यालय के समग्र विकास और शैक्षणिक गुणवत्ता को सुधारने के लिए चार स्तरीय प्रशासनिक ढांचा तैयार किया गया है—
- एपेक्स बॉडी: मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में नीतिगत निर्णय।
- सामान्य निकाय: शिक्षा मंत्री की अध्यक्षता में संचालन।
- कार्यकारिणी समिति: 10 वर्ष के अनुभवी पूर्व छात्र (Alumni) के नेतृत्व में, जिनका चयन ऑनलाइन आवेदन से होगा।
- विद्यालय प्रबंधन समिति: प्राचार्य की अध्यक्षता में दैनिक कार्यों का संचालन।
क्यों जरूरी था यह बदलाव?
सूत्रों के अनुसार, यह सुधार कई चुनौतियों को ध्यान में रखकर किया गया है—
- शैक्षणिक उपलब्धियों में गिरावट,
- शिक्षकों के लगभग 50 प्रतिशत पद रिक्त होना,
- योग्य संविदा शिक्षकों की कमी,
- केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के अनुरूप प्रबंधन ढांचे का अभाव,
- और मेधावी छात्रों का घटता आकर्षण।
सत्र 2026-27 से लागू होगी नई व्यवस्था
चूंकि शैक्षणिक सत्र 2025-26 की प्रवेश प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, इसलिए यह नई नियमावली सत्र 2026-27 से प्रभावी होगी।
शिक्षा के क्षेत्र में ऐतिहासिक पहल
विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय न केवल नेतरहाट विद्यालय की प्रतिष्ठा को पुनर्स्थापित करेगा, बल्कि झारखंड में गुणवत्तापूर्ण और समावेशी शिक्षा को भी नई ऊंचाई देगा। बेटियों के लिए खुलते इस ऐतिहासिक द्वार से राज्य के शैक्षणिक इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है।






