—गम्हरिया और गोड्डा की घटनाओं का किया जिक्र, दोनों मामलों की निष्पक्ष जांच और पीड़िताओं की सुरक्षा की मांग
रांची। झारखंड में महिलाओं के खिलाफ यौन शोषण और दुष्कर्म के आरोपों से जुड़े मामलों को लेकर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने राज्य की हेमंत सोरेन सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने गम्हरिया थाना क्षेत्र में एक महिला से कथित दुष्कर्म और गोड्डा के सुंदरपहाड़ी स्थित मिशनरी स्कूल से जुड़े फादर पर लगे यौन शोषण के आरोपों का उल्लेख करते हुए राज्य में महिला सुरक्षा की स्थिति पर सवाल उठाए हैं।
महिला सुरक्षा को लेकर सरकार पर उठाए सवाल
आदित्य साहू ने कहा कि राज्य में महिलाओं के खिलाफ लगातार गंभीर घटनाएं सामने आ रही हैं, लेकिन सरकार उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के बजाय दिल्ली की राजनीति और प्रदर्शनों में व्यस्त है। उन्होंने आरोप लगाया कि हेमंत सोरेन सरकार महिलाओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देने में विफल रही है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने सवाल किया कि आखिर झारखंड में महिलाएं खुद को सुरक्षित कहां महसूस करें? उन्होंने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है और इस दिशा में ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।
गोड्डा के मिशनरी स्कूल से जुड़े मामले का किया जिक्र
साहू ने गोड्डा के सुंदरपहाड़ी स्थित एक मिशनरी स्कूल में काम करने वाली महिला रसोइया के आरोपों का उल्लेख किया। उनके मुताबिक, महिला ने स्कूल के फादर पर लंबे समय तक यौन शोषण और दुष्कर्म करने का आरोप लगाया है। प्राथमिकी में गर्भपात की दवा देने और धमकी देने जैसे आरोप भी शामिल हैं। इस मामले में सुंदरपहाड़ी थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है।
गम्हरिया थाना क्षेत्र की घटना पर भी जताई चिंता
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने गम्हरिया थाना क्षेत्र से जुड़े कथित दुष्कर्म के मामले को भी गंभीर बताया। उन्होंने कहा कि महिलाएं जब न्याय की उम्मीद लेकर थाने पहुंचती हैं, तब भी ऐसी घटनाओं के सामने आने से पुलिस व्यवस्था और महिला सुरक्षा को लेकर चिंता पैदा होती है।
निष्पक्ष जांच और पीड़िताओं की सुरक्षा की मांग
आदित्य साहू ने दोनों मामलों की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराने, आरोपितों की गिरफ्तारी तथा पीड़िताओं को पर्याप्त सुरक्षा देने की मांग की। उन्होंने कहा कि किसी भी धर्म, संस्था या प्रभावशाली व्यक्ति को कानून से ऊपर नहीं माना जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी मांग की कि जांच के दौरान किसी तरह का राजनीतिक या संस्थागत दबाव नहीं होना चाहिए, ताकि पीड़िताओं को न्याय मिल सके।






