जेजेएम 2.0 पर झारखंड और केंद्र के बीच एमओयू, मुख्यमंत्री ने लंबित केंद्रीय सहायता राशि जारी करने का किया आग्रह

Share

—हर घर नल से जल पहुंचाने के लक्ष्य को गति देने पर सहमति

रांची, 02 जून। जल जीवन मिशन (जेजेएम) 2.0 के तहत झारखंड सरकार और केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के बीच मंगलवार को समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। नई दिल्ली में आयोजित समारोह की अध्यक्षता केंद्रीय जल शक्ति मंत्री C. R. Patil ने की, जबकि झारखंड के मुख्यमंत्री Hemant Soren रांची से ऑनलाइन माध्यम से कार्यक्रम में शामिल हुए।

जल जीवन मिशन को मिशन मोड में आगे बढ़ाने पर जोर

समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि जल जीवन मिशन 2.0 के तहत हुआ यह समझौता भविष्य में मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने कहा कि वर्ष 2019 से केंद्र सरकार हर घर तक नल से जल पहुंचाने के लक्ष्य के साथ कार्य कर रही है और झारखंड सरकार भी इस मिशन को राज्य के प्रत्येक घर तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार केंद्र के साथ समन्वय स्थापित कर योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

भौगोलिक चुनौतियों का किया उल्लेख

मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड की भौगोलिक परिस्थितियां इस योजना के क्रियान्वयन को चुनौतीपूर्ण बनाती हैं। राज्य के अनेक ग्रामीण और वन क्षेत्रों में पेयजल परियोजनाओं को लागू करने के दौरान विभिन्न एजेंसियों से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) प्राप्त करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासों से एनओसी संबंधी समस्याओं का समाधान कर योजनाओं को समय पर पूरा किया जा सकता है।

जल सहियाओं के लिए केंद्रीय सहायता की मांग

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने पेयजल योजनाओं के संचालन के लिए लगभग 30 हजार जल सहियाओं की नियुक्ति की है। ये जल सहिया दीदियां ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था के संचालन और निगरानी का कार्य कर रही हैं।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रत्येक जल सहिया को प्रति माह दो हजार रुपये मानदेय देती है और केंद्र सरकार से आग्रह किया कि जल सहिया घटक को जल जीवन मिशन में शामिल करते हुए इसके लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाए।

24,635 करोड़ रुपये की परियोजनाओं पर काम

मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2019-20 से राज्य में जल जीवन मिशन के तहत 24,635 करोड़ रुपये की लागत वाली पेयजल योजनाओं का क्रियान्वयन किया जा रहा है। इसके अंतर्गत मल्टी विलेज स्कीम (एमवीएस) और सिंगल विलेज स्कीम (एसवीएस) पर विशेष ध्यान दिया गया है।

लंबित केंद्रीय सहायता राशि जारी करने का आग्रह

मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री को अवगत कराया कि वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 के दौरान केंद्र सरकार से पर्याप्त धनराशि प्राप्त नहीं हुई है। उन्होंने स्वीकार्य केंद्रांश राशि शीघ्र जारी करने का अनुरोध किया।

मुख्यमंत्री के अनुसार, राज्य में अब तक 55 प्रतिशत परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जबकि पूर्ण किए गए कार्यों के मुकाबले केंद्र से केवल 46 प्रतिशत अनुदान प्राप्त हुआ है। उन्होंने लगभग 6,500 करोड़ रुपये की लंबित सहायता राशि जारी करने की मांग भी उठाई।

समयबद्ध कार्यान्वयन के लिए सहयोग की अपेक्षा

मुख्यमंत्री ने कहा कि योजनाओं को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा करने के लिए केंद्र सरकार की विभिन्न संस्थाओं से समय पर एनओसी और प्रशासनिक सहयोग मिलना आवश्यक है। उन्होंने विश्वास जताया कि केंद्र और राज्य के समन्वित प्रयासों से जल जीवन मिशन के लक्ष्य को सफलतापूर्वक हासिल किया जा सकेगा।

समारोह में केंद्रीय राज्य मंत्री V. Somanna, झारखंड के पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री Yogendra Prasad, जल शक्ति मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी तथा राष्ट्रीय जल जीवन मिशन के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।

Share this article

Facebook
Twitter X
WhatsApp
Telegram
 
October 2026
M T W T F S S
 1234
567891011
12131415161718
19202122232425
262728293031