चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल की मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती को दिल्ली तलब किया

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कोलकाता। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) कार्य को लेकर पश्चिम बंगाल की मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती को निर्वाचन आयोग ने तलब किया है। आयोग सूत्रों के अनुसार, एसआईआर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के मामले में चार अधिकारियों के खिलाफ अबतक कार्रवाई क्यों नहीं की गई, इस संबंध में स्पष्टीकरण के लिए मुख्य सचिव को बुलाया गया है।

इससे पहले अगस्त माह में जब मनोज पंथ राज्य के मुख्य सचिव थे, उन्हें इसी मुद्दे पर आयोग ने तलब किया था और उन्होंने आयोग के कार्यालय में उपस्थित होकर जवाब दिया था।

निर्वाचन आयोग ने पूर्व मेदिनीपुर जिले के मोयना और दक्षिण 24 परगना जिले के बारुईपुर पूर्व विधानसभा क्षेत्र में कथित रूप से अवैध तरीके से मतदाता सूची में नाम जोड़ने के आरोपों के आधार पर संबंधित निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) और सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (एईआरओ) के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया था। जिन चार अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की बात कही गई थी, उनके नाम तथागत मंडल, देवोत्तम दत्तचौधरी, बिप्लब सरकार और सुदीप्त दास हैं। आयोग ने उन्हें निलंबित करने के निर्देश दिए थे। साथ ही, डेटा एंट्री कार्य से जुड़े कर्मचारी सुरजीत हालदार के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया गया था।

आयोग ने पहले 05 अगस्त को राज्य सरकार को पत्र भेजा था और फिर 08 अगस्त को दोबारा स्मरण पत्र जारी किया। तत्कालीन मुख्य सचिव को संबंधित अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया गया था। हालांकि, राज्य सरकार की ओर से सूचित किया गया कि मोयना विधानसभा क्षेत्र के एईआरओ सुदीप्त दास और बारुईपुर पूर्व के डेटा एंट्री ऑपरेटर सुरजीत को निर्वाचन संबंधी दायित्वों से हटा दिया गया है, जबकि अन्य अधिकारियों के खिलाफ तत्काल कोई कार्रवाई नहीं की गई।

निर्देश लागू न होने पर आयोग ने 02 जनवरी को संबंधित दो जिलाधिकारियों को एफआईआर दर्ज कराने का निर्देश दिया। यह आदेश भी लागू नहीं हुआ। इसके बाद मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (सीईओ) कार्यालय की ओर से जिलाधिकारियों को दो बार रिमाइंडर भेजा गया।

सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार ने बाद में महाधिवक्ता से कानूनी परामर्श लिया और सीईओ कार्यालय को पत्र भेजकर कहा कि संबंधित अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने योग्य पर्याप्त आधार नहीं हैं और अपेक्षाकृत कम गंभीर आरोपों में इतनी कठोर कार्रवाई उचित नहीं होगी। इसके बाद 21 जनवरी को आयोग ने मुख्य सचिव से विस्तृत रिपोर्ट मांगी कि किस विभाग ने आयोग के निर्देशों का पालन नहीं किया। इसी क्रम में अब मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से तलब किया गया है।

उल्लेखित चारों अधिकारी पश्चिम बंगाल सिविल सेवा (डब्ल्यूबीसीएस) के अधिकारी हैं और विभिन्न प्रशासनिक पदों पर कार्यरत हैं। आयोग की अगली कार्रवाई और मुख्य सचिव की बैठक के बाद इस मामले में आगे की दिशा स्पष्ट होने की संभावना है।

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